बिहार की राजनीति में मंगलवार को नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद एक युग का अंत माना जा रहा है। वहीं, सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी के बिहार में नए युग की शुरुआत होने जा रही है। एनडीए विधायक दल की बैठक में सम्राट के नाम पर मुहर के फैसले के साथ ही एक पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है, जिसे अब 'राजनीतिक भविष्यवाणी' के तौर पर देखा जा रहा है। ये कयास तारापुर में (30 अक्टूबर 2025) को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के आधार पर लगाए जा रहे हैं।
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तारापुर में एक जनसभा को संबोधित कर एनडीए के पक्ष में वोट करने की अपील की थी। रैली में सम्राट चौधरी को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा था कि उन्हें वोट दीजिए, क्योंकि आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें 'बहुत बड़ा आदमी' बनाने जा रहे हैं।
क्या बोले थे शाह?
शाह ने कहा था कि हमने स्थानीय जदयू विधायक राजीव सिंह को सम्राट चौधरी के पक्ष में अपनी सीट छोड़ने के लिए राजी किया। तारापुर के लोग, अन्य जगहों के लोग हमसे अपने विधायकों के लिए मंत्री पद दिलाने का अनुरोध करते हैं। आपके विधायक तो स्वत: ही उपमुख्यमंत्री हैं। आपको बता दें कि सम्राट चौधरी तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और उनका जन्म भी यहीं पर हुआ।
गृह मंत्री अमित शाह का वह बयान उस समय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना था और विपक्ष समेत अन्य राजनीतिक विशेषज्ञ इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य से जोड़कर भी देख रहे थे। 5 महीने बाद अब, जब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा की गई है, तो यह बयान एक तरह से सटीक राजनीतिक संकेत या भविष्यवाणी जैसा नजर आ रहा है।
सम्राट चौधरी पहले उपमुख्यमंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक मैदान में तेजी से उभरे हैं। पार्टी के अंदर उनकी पकड़ मजबूत हुई और संगठन से लेकर सरकार तक उनकी भूमिका लगातार बढ़ती गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का वह बयान सिर्फ चुनावी बयान नहीं था, बल्कि भाजपा की लंबी रणनीति का हिस्सा था। बिहार में सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक मजबूती के बीच सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने की योजना पहले से ही तय थी, जो अब साकार होती दिख रही है।
अब जब सम्राट चौधरी राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं, तो यह साफ हो गया है कि बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि पहले से तय रणनीति का परिणाम है, जिसके संकेत अमित शाह के उस बयान में साफ दिखाई दे चुके थे।
