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आसमान से बरसती आग और हिमालय पर पिघलती बर्फ, El Nino की फिर होगी वापसी; मानसून और गर्मी को लेकर डरावनी चेतावनी

IMD Update: भारत में गर्मी का कहर जारी है। WMO ने EL Nino की वापसी और हिमालय में बर्फ के रिकॉर्ड स्तर तक गिरने की चेतावनी दी है। जानें कैसा रहने वाला है मानसून और गर्मी का हाल।

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2026 में भारत के सामने मौसम का सबसे बड़ा संकट

Photo : Times Now Digital

Weather Update: मौसम के बदलते मिजाज ने इस वक्त पूरे भारत को अपनी चपेट में ले लिया है। उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक सूरज की तपिश आग बरसा रही है, तो वहीं हिमालय की चोटियों पर बर्फ का पिघलना भविष्य के एक बड़े जल संकट की ओर इशारा कर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की हालिया चेतावनियों ने 2026 के आगामी महीनों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

अल नीनो की वापसी (El Nino in 2026 India)

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी WMO ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है कि अल नीनो (El Nino) की स्थिति मई से जुलाई 2026 के बीच फिर से लौट सकती है। अल नीनो प्रशांत महासागर की सतह के तापमान को बढ़ा देता है, जिसका सीधा असर वैश्विक हवाओं और बारिश के पैटर्न पर पड़ता है।

2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है, और यदि 2026 के मध्य में अल नीनो फिर से सक्रिय होता है, तो यह मानसून को कमजोर कर सकता है और गर्मी के रिकॉर्ड तोड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति कृषि, जल प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।

क्या होता है अल नीनो? (What is El Nino in Hindi)

आसान भाषा में कहें तो अल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाले बदलाव हैं, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करते हैं। अल नीनो तब होता है जब समुद्र का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे भारत जैसे देशों में मानसून कमजोर पड़ता है और भीषण गर्मी या सूखे की स्थिति पैदा होती है। इसके ठीक उलट, ला नीना के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है, जिससे भारत में अच्छी बारिश और कड़ाके की ठंड पड़ती है। सीधे शब्दों में, अल नीनो 'सूखे और गर्मी' का संकेत है, जबकि ला नीना 'अच्छी बारिश और ठंड' का संदेश लेकर आता है।

हिमालय में बर्फ खत्म: जल संकट की आहट (Snow Persistence in Himalaya)

ICIMOD की 'स्नो अपडेट 2026' रिपोर्ट ने विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। हिंदूकुश हिमालयी क्षेत्र में बर्फ का भंडार (Snow Persistence) लगातार चौथे साल रिकॉर्ड स्तर पर गिरा है। इस साल बर्फ का जमाव औसत से 27.8% कम रहा है, जो पिछले 20 वर्षों में सबसे कम है। हिमालय की बर्फ एशिया की 12 बड़ी नदियों का मुख्य स्रोत है, जिससे लगभग 200 करोड़ लोगों की प्यास बुझती है। बर्फ के इस 'सिस्टमैटिक कोलैप्स' का मतलब है कि आने वाले समय में गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जलस्तर में भारी कमी आएगी, जिससे खेती और बिजली उत्पादन (Hydropower) पर बुरा असर पड़ेगा।

Illustration of the physical process of El Nino

अल नीनो की गतिविधि (चित्र साभार: IIRS)

उत्तर और मध्य भारत में गर्मी का तांडव (IMD Weather Alert Today)

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी भागों, विशेषकर दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में प्रचंड गर्मी ने कोहराम मचा दिया है। शनिवार को दिल्ली में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि राजस्थान के जयपुर और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पारा 44 डिग्री को छू सकता है। औद्योगिक इकाइयों और वाहनों के धुएं ने प्रदूषण के साथ मिलकर इस गर्मी को और भी घातक बना दिया है।

सुबह 10 बजे के बाद ही लू (Heatwave) के थपेड़े लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 3-4 दिनों तक दिल्ली, चंडीगढ़, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। हालांकि, 27 अप्रैल के आसपास दिल्ली में हल्की गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है, जो अस्थायी राहत दे सकती है।

पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर: आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट (IMD Rain Alert Today)

जहाँ पश्चिम और मध्य भारत तप रहा है, वहीं पूर्वी भारत के राज्यों में मौसम करवट लेने वाला है। IMD ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 26 से 28 अप्रैल के बीच 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने का अनुमान जताया है। बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर में 26-27 अप्रैल को आंधी-बारिश की संभावना है। वहीं पूर्वोत्तर के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विभाग (IMD) ने आज भविष्यवाणी की है कि गुवाहाटी शहर के विभिन्न हिस्सों में अगले 3-4 दिनों तक कहीं-कहीं भारी से अति भारी वर्षा (24 घंटे में 7 से 20 सेंटीमीटर तक) होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

मानसून 2026: क्या फिर होगी कम बारिश? (Monsoon 2026 Update)

IMD ने अपने शुरुआती पूर्वानुमान में कहा है कि इस साल का दक्षिण-पश्चिम मानसून 'सामान्य से नीचे' (92% LPA) रहने की संभावना है। 11 वर्षों में यह पहली बार है जब विभाग ने इतनी कम बारिश का अनुमान जताया है। इसका मुख्य कारण अल नीनो का प्रभाव माना जा रहा है। यदि मानसून कमजोर रहता है, तो खाद्य उत्पादन और महंगाई पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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