वाराणसी

Varanasi: सावन भर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, नगर निगम ने लिया फैसला

वाराणसी नगर निगम ने सावन के दौरान मांस-मछली की दुकानों को बंद रखने का फैसला किया है। नगर निगम के मुताबिक, हाल ही में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और संत समाज ने यह मांग उठाई थी कि सावन माह के दौरान धार्मिक माहौल की पवित्रता बनाए रखने के लिए मीट और मछली की दुकानों पर रोक लगाई जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा फैसला लिया गया है।

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सावन भर बंद रहेंगी मीट-मछली की दुकानें (तस्वीर साभार: Canva)

Varanasi News: सावन माह में काशी में श्रद्धा और भक्ति के माहौल को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। अब सावन के पूरे महीने नगर क्षेत्र में मीट और मछली की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। यह फैसला नगर निगम की विशेष बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि यह पाबंदी सिर्फ कांवड़ रूट तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरे नगरीय क्षेत्र में लागू रहेगी। इस निर्देश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज कर FIR भी दर्ज कराई जाएगी।

श्रद्धालुओं की मांग पर लिया गया फैसला

नगर निगम के अनुसार, बीते दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और संत समाज की ओर से यह मांग की गई थी कि सावन माह के दौरान धार्मिक वातावरण की पवित्रता बनाए रखने के लिए मीट-मछली की दुकानों पर रोक लगाई जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने यह सख्त निर्णय लिया है।

संत समाज ने किया स्वागत

नगर निगम के फैसले का संत समाज ने खुले दिल से स्वागत किया है। केंद्रीय संत समीति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि आस्था से बढ़कर कुछ नहीं होता। नगर निगम ने श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए सही निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद सावन माह में बाबा विश्वनाथ की नगरी और अधिक भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक अनुशासन में रंगी नजर आएगी। नगर निगम ने सभी दुकानदारों को निर्देश जारी कर पालन सुनिश्चित कराने की व्यवस्था शुरू कर दी है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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