Uttarakhand Rudraprayag Forest Fire: उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिले के जंगल इन दिनों भीषण आग की चपेट में है। पहाड़ों से उठती आग की लंबी लंबी लपटें अब सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्होंने चारधाम यात्रा मार्ग और स्थानीय जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। जंगलों में लगी इस आग के कारण जहां बेजुबान वन्य जीव-जंतु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं, वहीं देश-विदेश से बाबा केदार के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक गर्मी और जहरीले धुएं के बीच घुटन भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
धुएं के गुबार में छिपे चांद और सूरज, सांस लेना हुआ दूभर
रुद्रप्रयाग के जंगलों से उठ रहे धुएं ने पूरे आसमान को अपनी आगोश में ले लिया है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि रात के समय आसमान में चांद की रोशनी तक धुएं के गुबार में गायब हो जा रही है, वहीं दिन के वक्त सूरज की किरणें भी जमीन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। चारों ओर फैले इस घने धुएं ने पूरे वातावरण को गैस चेंबर में तब्दील कर दिया है, जिससे लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
जाम का झाम: 8 से 10 घंटे फंसे रहे यात्री
चारधाम यात्रा रूट पर आए हजारों श्रद्धालु पहले से ही भारी वाहनों के दबाव और लंबे जाम की समस्या से जूझ रहे थे। ऐसे में जगह-जगह जंगलों में भड़की आग ने इस संकट को और अधिक विकराल बना दिया है। रास्तों पर घंटों तक वाहनों में फंसे यात्रियों को आग के कारण बढ़ी गर्मी, उमस और घने धुएं के बीच रहना पड़ रहा है। ग्राउंड जीरो पर यात्रियों से बातचीत के दौरान कई श्रद्धालुओं ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वे पिछले 8 से 10 घंटे से लगातार लंबे जाम में फंसे हुए हैं, जहां चारों तरफ फैले धुएं के कारण सांस लेना भी दूभर हो चुका है।
खराब विजिबिलिटी में उड़ रहे हेलीकॉप्टर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे गंभीर और चौंकाने वाला सवाल केदारनाथ यात्रा के लिए संचालित होने वाली हेली सेवाओं (Heli Services) पर खड़ा हो रहा है। चारों तरफ फैले घने धुएं और बेहद कम दृश्यता के बावजूद निजी हेली कंपनियां लगातार उड़ानें भर रही हैं। स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों का आरोप है कि इस खतरनाक धुंध के बीच बिना पुख्ता सुरक्षा मानकों के उड़ान भरना यात्रियों की जान को सीधे तौर पर जोखिम में डालना है। लोगों ने नागरिक उड्डयन विभाग और जिला प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने तथा हेली सेवाओं के सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की गुहार
वनाग्नि के इस रौद्र रूप से देवभूमि की प्रकृति, पर्यावरण, दुर्लभ वन्यजीव और इंसानी जिंदगी सब कुछ दांव पर लग गई है। तमाम दावों के बावजूद अभी तक आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार व जिला प्रशासन से युद्धस्तर पर प्रभावी कदम उठाने, आग बुझाने के आधुनिक संसाधन बढ़ाने और चारधाम यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।
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