Pilibhit News: पीलीभीत जिले में बीसलपुर नगर पालिका के एक निलंबित कर्मचारी ने मंगलवार को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। उन्होंने सुसाइड नोट में अधिशासी अधिकारी (ईओ) पर नौकरी बहाल कराने के नाम पर रिश्वत लेने और बाद में अतिरिक्त धन की मांग करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने बताया कि मृतक के भाई की शिकायत के आधार पर नगर पालिका अध्यक्ष के पति, ईओ और तीन अन्य लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पिछले साल गबन के आरोप में किया गया निलंबित
पुलिस के अनुसार, उपेंद्र शंखधर (52) ने बीसलपुर स्थित अपने घर के एक कमरे में फंदा लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। उसने बताया कि उपेंद्र शंखधर नगर पालिका में कर संग्राहक के पद पर कार्यरत थे और पिछले साल सितंबर में 30 लाख रुपये के कथित कर गबन के मामले में उन्हें निलंबित कर जेल भेजा गया था। पुलिस के अनुसार इस साल जनवरी में उन्हें जमानत मिली थी। इसके बाद से वह किराने की एक छोटी दुकान चला रहे थे।
नौकरी बहाली के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप
पुलिस ने बताया कि कमरे से बरामद पांच पन्नों के सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया है कि ईओ शमशेर सिंह ने नौकरी बहाल कराने का आश्वासन देकर उनसे करीब 18-19 लाख रुपये लिए, लेकिन नौकरी बहाल नहीं कराई। बाद में उन्होंने आठ लाख रुपये और मांगे। सुसाइड नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह रकम परिवार की जमीन बेचकर और गहने गिरवी रखकर जुटाई गई थी।
शंखधर के भाई अनुराग ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनके भाई के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार भी किया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने नगर पालिका अध्यक्ष के पति अमन जायसवाल उर्फ निक्की, अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह और तीन अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, शमशेर सिंह ने इन आरोपों को निराधार बताया है। बीसलपुर थाने के प्रभारी संजीव कुमार शुक्ला ने कहा कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। सुसाइड नोट में रिश्वत के कथित लेन-देन संबंधी आरोपों की भी जांच की जाएगी।
(इनपुट - भाषा)
