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UPSC में बिहार का डंका; किसी ने बिना कोचिंग पाई सफलता तो कोई दृष्टिबाधित होकर भी बना 'सुपर 20'

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए। इस बार के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रशासनिक सेवाओं के शिखर पर बिहार की मेधा का दबदबा बरकरार है। टॉप-10 में दो और टॉप-20 में पांच बिहार के बेटे-बेटियों ने पिछले साल के अपने ही प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया है।

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टॉप-20 में पांच बिहार के होनहार

Photo : Times Now Digital

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 के परिणामों में बिहार की मिट्टी ने एक बार फिर अपना लोहा मनवाया है। इस साल मुजफ्फरपुर से लेकर नवादा और औरंगाबाद तक, राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसी सफलता की कहानियां सामने आई हैं, जो आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गई हैं।

पिता के साये के बिना राघव ने रचा इतिहास

मुजफ्फरपुर के सरैयागंज के रहने वाले राघव झुनझुनवाला ने पूरे देश में चौथी रैंक हासिल कर राज्य में टॉप किया है। राघव की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने मात्र पांच साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। बचपन के संघर्षों के बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्कूलिंग में बिहार के कॉमर्स टॉपर रहने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (SRCC) से अर्थशास्त्र में स्वर्ण पदक जीता। राघव की यह यात्रा उनके अडिग आत्मविश्वास की मिसाल है। वहीं किशनगंज की जूही दास ने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। 649वीं रैंक पाने वाली शहर के खगड़ा की निवासी जूही दास ने इंटरव्यू से करीब 10 दिन पहले ही अपने पिता को मुखाग्नि दी थी।

दृष्टिबाधित रवि राज ने पाई 20वीं रैंक

नवादा के रवि राज ने अपनी शारीरिक सीमाओं को अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया। वे न तो देख सकते हैं और न ही स्वयं लिख सकते हैं, लेकिन उनके हौसले ने उन्हें 20वीं रैंक तक पहुंचा दिया। अपने पांचवें प्रयास में यह मुकाम हासिल करने वाले रवि वर्तमान में नागपुर में आईआरएस (IRS) की ट्रेनिंग ले रहे हैं। अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानने वाले रवि ने सामान्य वर्ग में यह स्थान पाकर इतिहास रच दिया है।

विरासत को आगे बढ़ा रहे यशस्वी और मोनिका

पटना के यशस्वी राजवर्धन ने 11वीं रैंक हासिल कर अपने आईएएस पिता रजनीश कुमार का गौरव बढ़ाया है। यशस्वी का कहना है कि बचपन से पिता को खाकी और शासन के बीच काम करते देख उन्हें सिविल सेवा में आने की प्रेरणा मिली। वहीं, औरंगाबाद की मोनिका श्रीवास्तव ने 16वीं रैंक पाकर जिले का मान बढ़ाया है। पूर्व में आईआईटी बिहार टॉपर रह चुकीं मोनिका ने पिछले साल 455वीं रैंक पाई थी, लेकिन बेहतर प्रदर्शन की जिद ने उन्हें टॉप-20 में ला खड़ा किया।

बिना कोचिंग के सफल हुए इशित्व

बाढ़ के पंडारक प्रखंड के ढीवर गांव के रहने वाले इशित्व आनंद की कहानी उन छात्रों के लिए संजीवनी है जो बड़े शहरों की महंगी कोचिंग नहीं जा सकते। इशित्व ने घर पर ही सेल्फ स्टडी कर 50वीं रैंक हासिल की। उनके पिता गांव में ही एक कोचिंग संस्थान चलाते हैं और मां आरपीएफ (RPF) में कार्यरत हैं। इशित्व ने साबित किया कि अगर संकल्प दृढ़ हो, तो गांव के एक कमरे से भी देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास की जा सकती है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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