Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा नजर आता है। वैशाली सेक्टर-5 के रहने वाले जिस 30 वर्षीय युवक को उसका परिवार मृत मान चुका था, मोर्चरी में जाकर जिसकी लाश की पहचान की थी, जिसका बकायदा अंतिम संस्कार कर 24 जून को 'तेरहवीं' का भोज तक करा दिया गया था, वह युवक गुरुवार (25 जून) की सुबह अचानक अपने पैरों पर चलकर जिंदा घर लौट आया।
युवक को अचानक जिंदा सामने देख जहां परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई, वहीं गाजियाबाद पुलिस के भी होश उड़ गए हैं। इस नाटकीय मोड़ के बाद पुलिस ने आनन-फानन में दर्ज मर्डर केस की फाइल को दोबारा खोल दिया है।
पड़ोसी से विवाद, जेल और फिर अचानक गायब
पुलिस के अनुसार, पूरा मामला वैशाली सेक्टर-5 के रहने वाले गिरधारी सिंह से जुड़ा है। 17 मई को कौशाम्बी थाने में गिरधारी के खिलाफ उसके पड़ोसी और ऑटोमोबाइल वर्कशॉप चलाने वाले शैलेश वर्मा (38) ने मारपीट की FIR दर्ज कराई थी। आरोप था कि विवाद के दौरान गिरधारी ने शैलेश के सिर पर हथौड़े से वार किया था।
इसके बाद पुलिस ने गिरधारी को एहतियातन हिरासत में लेकर डासना जेल भेज दिया। 21 मई को गिरधारी जेल से रिहा हुआ, लेकिन वह अपने घर नहीं पहुंचा। कई दिनों तक खोजबीन करने के बाद जब वह नहीं मिला, तो उसकी मां देवकी देवी ने मसूरी थाने में उसकी गुमशुदगी और अनहोनी की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई।
चेहरा खून से सना था... मां देखना चाहती थी पेट का निशान
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीते 13 जून को गिरधारी की मां देवकी देवी को मॉर्चरी में एक अज्ञात शव दिखाया गया। गिरधारी की बहन हांशू बिष्ट ने बताया कि जब परिवार मॉर्चरी पहुंचा, तो पोस्टमार्टम हो चुका था और बॉडी पूरी पैक थी। कर्मचारियों ने हमें सिर्फ चेहरा दिखाया। चेहरा खून से सना हुआ था, लेकिन हमारे साथ गए सभी लोगों को लगा कि यह गिरधारी ही है। मां ने कर्मचारियों से अनुरोध किया था कि एक बार बॉडी के पेट से कपड़ा हटाकर दिखाया जाए, क्योंकि गिरधारी के पेट पर जन्मजात निशान था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
पहचान होने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया और बिना DNA मैचिंग के उसका अंतिम संस्कार भी हो गया। इसके बाद मां की शिकायत पर पड़ोसी शैलेश वर्मा, उसके भाइयों धर्मेंद्र और सुनील वर्मा के खिलाफ हत्या (BNS धारा 103(1)) का केस दर्ज कर लिया गया।
पड़ोसी बोले- पुलिस हमारे भाइयों को उठा ले गई; पुलिस का इनकार
इधर गिरधारी के वापस आने के बाद वर्मा परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाइयों के लापता होने की बात कहते हुए बबलू वर्मा ने कहा कि 13 जून की रात पुलिस उनके भाइयों को वर्कशॉप से उठाकर ले गई थी और तब से उनका कुछ पता नहीं है। हालांकि, इंदिरापुरम के ACP अभिषेक श्रीवास्तव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कौशाम्बी या मसूरी पुलिस ने किसी को गिरफ्तार या डिटेन नहीं किया था। डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने भी साफ किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना आया था, हत्या नहीं, इसलिए कोई गिरफ्तारी नहीं की गई थी।
जेल से सीधे 'सत्संग' चला गया था गिरधारी
घर के बाहर जमा पत्रकारों से बात करते हुए खुद गिरधारी सिंह ने अपने गायब होने का राज खोला। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उसने बताया कि, जेल से छूटने के बाद वह मानसिक रूप से बहुत परेशान और दुखी था। इसलिए वह किसी को बिना बताए पंजाब के ब्यास नदी के पास होने वाले एक सत्संग में चला गया था। और गुस्से और तनाव के कारण परिवार से कोई संपर्क नहीं किया।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल: आखिर वो शव किसका था?
मसूरी के ACP अजय कुमार ने बताया कि चूंकि गिरधारी सिंह सुरक्षित वापस लौट आया है, इसलिए उसके खिलाफ दर्ज मर्डर की FIR को कानूनी प्रक्रिया के तहत बंद कर दिया जाएगा लेकिन अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस अज्ञात शव की शिनाख्त करना है, जिसे गिरधारी का परिवार अपना समझकर अंत्येष्टि कर चुका है। पुलिस अब नए सिरे से उस मृतक की पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
