उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो आरोपियों दानियाल अशरफ और कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ये दोनों आरोपी सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में थे और भारत में संवेदनशील संस्थानों, पुलिस ठिकानों और सुरक्षाबलों पर हमले की साजिश रच रहे थे।
ATS को इनपुट मिला था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। उन्हें पहले दोस्ती और लालच देकर अपने संपर्क में लाया जाता है, फिर धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है। इसी इनपुट पर कार्रवाई करते हुए ATS ने जांच शुरू की और दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई।
जांच में सामने आया कि बाराबंकी निवासी दानियाल अशरफ और कुशीनगर निवासी कृष्णा मिश्रा पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स शहजाद भट्टी और आबिद जट के संपर्क में थे। ये दोनों आरोपी भारत में अलग-अलग जगहों के वीडियो और फोटो बनाकर पाकिस्तान भेज रहे थे। इनमें पुलिस थाने, सरकारी इमारतें और अन्य संवेदनशील स्थान शामिल थे। माना जा रहा है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल भविष्य में हमलों की योजना बनाने के लिए किया जाना था।
ATS ने तकनीकी सर्विलांस और पुख्ता सबूतों के आधार पर 5 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए कृष्णा मिश्रा को गोरखपुर से और दानियाल अशरफ को बाराबंकी से गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान के हैंडलर्स के संपर्क में आए थे। शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे काम दिए गए, लेकिन बाद में उन्हें बड़े हमलों की साजिश में शामिल करने की कोशिश की जा रही थी।
मोबाइल फोन से कई अहम सबूत मिले
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कई अहम सबूत मिले हैं। इनमें संवेदनशील जगहों के वीडियो, फोटो और चैट्स शामिल हैं। कुछ चैट्स में पाकिस्तान के हैंडलर्स द्वारा हमले की योजना, लोकेशन और टारगेट्स को लेकर बातचीत भी सामने आई है। इसके अलावा, आरोपियों को पैसों का लालच देकर काम करवाने की बात भी सामने आई है।
ATS के मुताबिक, दानियाल अशरफ को एक वीडियो बनाने के लिए कहा गया था जिसमें किसी पुलिस स्टेशन या अन्य महत्वपूर्ण जगह की पूरी जानकारी हो। वहीं कृष्णा मिश्रा के फोन से भी कई संदिग्ध ऑडियो-वीडियो क्लिप्स मिले हैं, जिनमें हमले से जुड़ी बातें और निर्देश दिए जा रहे थे।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस मॉड्यूल की जड़ें और कितनी गहरी हैं।
बरामदगी की बात करें तो दानियाल अशरफ के पास से एक देसी पिस्टल, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किया गया है। वहीं कृष्णा मिश्रा के पास से .315 बोर का तमंचा, कारतूस और मोबाइल फोन मिला है।
फिलहाल ATS इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है और यह जांच की जा रही है कि कहीं और भी ऐसे लोग तो सक्रिय नहीं हैं, जिन्हें सोशल मीडिया के जरिए इस तरह के नेटवर्क से जोड़ा गया हो। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि किस तरह दुश्मन देश सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर युवाओं को गुमराह करने और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
