Delhi Unauthorised Colonies: दिल्ली के स्थानीय निकायों ने दिल्ली विशेष उपबंध कानून की अवधि एक बार फिर बढ़ाने की सिफारिश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कानून जून 2014 से पहले अनधिकृत कॉलोनियों में बने अवैध निर्माणों को दंडात्मक कार्रवाई से लगभग पूरी सुरक्षा देता है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि दिसंबर 2026 में इसकी मियाद खत्म होने से पहले इसे तीन साल का एक और विस्तार मिलने की संभावना है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राजधानी की बेतरतीब बसी बस्तियों में इमारतें गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
नगर निगम ने सौंपी रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विशेष कानून के तहत संरक्षण बढ़ाने के लिए शहरी स्थानीय निकायों से रिपोर्ट मांगी जाती है। उन्होंने कहा, 'हम अपनी रिपोर्ट जमा कर चुके हैं। संसद को अंतिम फैसला लेना है, लेकिन समस्या का दायरा इतना बड़ा है कि संरक्षण बढ़ाना ही पड़ेगा, वरना लाखों इमारतें कार्रवाई और तोड़फोड़ की श्रेणी में आ जाएंगी।' पिछले महीने नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) भी ऐसी ही प्रक्रिया पूरी कर चुकी है।2006 से चला आ रहा सिलसिला
इस संरक्षण की जड़ें फरवरी 2006 में हैं, जब अदालती आदेशों के बाद एमसीडी ने पूरे शहर में सीलिंग अभियान चलाया था। अनधिकृत निर्माण इतने बड़े पैमाने पर थे कि संसद को दखल देना पड़ा और तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2006 में यह कानून पारित किया। शुरुआत में सीलिंग से सुरक्षा सिर्फ एक साल के लिए थी, लेकिन इसे 2007, 2009 और 2011 में बढ़ाया गया और फिर 2023 तक हर तीन साल पर विस्तार मिलता रहा। 2023 के दूसरे संशोधन अधिनियम ने इसे 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया था।
बुनियादी समस्या पर शायद ही ध्यान दिया
विशेषज्ञों का कहना है कि एक साल के लिए बना यह प्रावधान अब कमियों का जरिया बन गया है और सरकार को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, हर सरकार ने नियमितीकरण योजनाओं और विशेष कानूनों से इन बस्तियों को बनाए रखा, लेकिन नियोजित आवास और व्यावसायिक जगह की कमी जैसी बुनियादी समस्या पर शायद ही ध्यान दिया गया।
नियमितीकरण योजना की सुस्त रफ्तार
इस बीच 7 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को 'जैसी हैं, जहां हैं' के आधार पर नियमित करने की घोषणा की थी, जिनकी अनुमानित आबादी 45 लाख है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि स्वीकृत लेआउट प्लान के बिना भी संपत्तियां नियमित हो सकेंगी। भूमि उपयोग को छोटी दुकानों के अलावा आवासीय माना जाएगा। लेकिन प्रतिक्रिया बेहद फीकी रही है। एमसीडी के आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 137 आवेदन आए हैं, जिनमें से 22 मंजूर हुए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि शुल्क घटाया गया है और लोग सीधे स्वतंत्र आर्किटेक्ट के जरिए भी आवेदन कर सकते हैं, फिर भी संख्या बहुत कम है।
PM-UDAY की समय-सीमा बढ़ी
धीमी प्रगति को देखते हुए प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना (PM-UDAY) के तहत आवेदन की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 जनवरी 2027 कर दी गई है। राजस्व विभाग ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी की। 2019 में शुरू हुई इस योजना का मकसद अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देना था। नियम बदलने के बाद जिम्मेदारी एमसीडी को सौंपी गई, जिसके तहत अब तक सिर्फ दो नए लाभार्थी जुड़े हैं, जबकि पहले लगभग 37,000 लोगों को लाभ मिला था।
सुरक्षा पर सवाल
एक अधिकारी ने इमारतें गिरने की हालिया घटनाओं के मद्देनजर चिंता जताई। उनके मुताबिक अधिकांश इमारतें भवन उपनियमों का पालन नहीं करतीं, और 'जैसी हैं, जहां हैं' का प्रावधान कमजोर ढांचों के नियमितीकरण का रास्ता भी खोल देता है।
