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Gold-Silver Prices Crash: अक्टूबर में 40000 रुपये सस्ती हुई चांदी, पहुंची 11 महीने के निचले स्तर पर, सोना का क्या है हाल?

Gold-Silver Price Crash: अक्टूबर में बढ़ती महंगाई और अमेरिकी ब्याज दरों की आशंकाओं के चलते सोना और चांदी में भारी गिरावट आई है। चांदी 11 महीने और सोना 7 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।

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एक महीने में कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी (तस्वीर-Canva)

Gold-Silver Price Crash : भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सोने और चांदी के निवेशकों के लिए अक्टूबर का महीना भारी झटका देने वाला साबित हुआ है। चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह अपने 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी ओर, सोने की कीमतें भी गिरकर पिछले 7 महीनों के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इन दोनों कीमती धातुओं में अचानक आई इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है।

चांदी में रिकॉर्ड गिरावट: अक्टूबर में 40,000 रुपये तक सस्ती हुई चांदी

अक्टूबर महीने में चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर बहुत तेजी से गहराया है। एमसीएक्स (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के सौदों में शुक्रवार के कारोबार के दौरान 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम की बड़ी गिरावट देखी गई। इस भारी बिकवाली के कारण चांदी 1.80 लाख रुपये का स्तर तोड़ते हुए 1,79,600 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक गिर गई। इससे पहले चांदी को इस स्तर पर पिछले साल दिसंबर में कारोबार करते हुए देखा गया था। केवल अक्टूबर के एक महीने के दौरान ही चांदी की कीमत में करीब 45,000 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी कमी आ चुकी है। साल 2025 में चांदी की कीमतों में एकतरफा और रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी, लेकिन हालिया गिरावट की वजह से उस बढ़त का 50% से अधिक हिस्सा खत्म हो चुका है। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 1 अक्टूबर 2026 को चांदी कीमत 2,20,829 रुपए प्रति किलो थी, जो महीने के आखिरी दिन 30 अक्टूबर 1,81,344 रुपये किलो हो गई। यानी चांदी एक महीने में 39,485 रुपये सस्ती हुई।

सोना भी लगातार फिसल रहा: 7 महीने के निचले स्तर पर पहुंचे दाम

चांदी की ही तरह सोने के तेवर भी ढीले पड़े हैं। सर्राफा और वायदा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को सोना 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर 1,38,249 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। यह सोने का बीते मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। आंकड़ों पर नजर डालें तो सितंबर महीने में सोने में 5,400 रुपये की गिरावट आई थी, जिसके बाद अक्टूबर महीने में इसमें 10,787 रुपये प्रति 10 ग्राम की अतिरिक्त गिरावट दर्ज की गई है। इस तरह दो महीनों से सोने में लगातार मंदी का रुख बना हुआ है। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 1 अक्टूबर को 24 कैरेट का सोना 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो महीने के आखिरी कारोबारी दिन 30 अक्टूबर को घटकर 1,40,054 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। यानी एक महीने में 8084 रुपये सस्ता हो गया।

ऑल-टाइम हाई (रिकॉर्ड स्तर) से कितना नीचे गिरे सोना और चांदी?

अगर इन दोनों धातुओं की तुलना इनके अब तक के सबसे उच्चतम स्तर से करें, तो गिरावट का आंकड़ा काफी बड़ा है। चांदी अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किग्रा से करीब 57% तक टूट चुकी है। उल्लेखनीय है कि 2025 में चांदी ने करीब 170% की जोरदार तेजी दिखाई थी, जिसके बाद अब यह बड़ा करेक्शन देखने को मिल रहा है। सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम से 42,321 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।

क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम? समझें गिरावट की मुख्य वजहें

आमतौर पर जब दुनिया में अनिश्चितता या महंगाई बढ़ती है, तब लोग सोने-चांदी को सुरक्षित विकल्प मानकर इसमें पैसा लगाते हैं। लेकिन इस बार स्थिति उल्टी नजर आ रही है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:-

  • अमेरिका में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका:- अमेरिका में पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स सितंबर में 0.5% बढ़ा है, जो मार्च के बाद सबसे ज्यादा है। सालाना महंगाई दर बढ़कर 3.6% हो गई है। जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरों के समय निवेशक बिना ब्याज या यील्ड देने वाले सोने-चांदी की जगह अन्य रिटर्न देने वाले विकल्पों की तरफ रुख करने लगते हैं।
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व का तनाव:- मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिससे कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। कच्चे तेल के दाम लगातार चौथे महीने बढ़े हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई लंबे समय तक बने रहने का खतरा पैदा हो गया है।
  • मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था:- अमेरिका की तीसरी तिमाही की जीडीपी विकास दर अनुमान से बेहतर (3.4%) रही है। मजबूत अर्थव्यवस्था और एआई में भारी निवेश के कारण अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है।
  • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख:- अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.75%-4% पर स्थिर रखा है, लेकिन महंगाई दबावों को देखते हुए दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 75% तक जताई जा रही है।

इन्हीं वैश्विक वजहों, ऊंचे क्रूड ऑयल और सख्त मौद्रिक नीतियों की संभावना के कारण निवेशकों का भरोसा सोने-चांदी से थोड़ा कम हुआ है, जिससे दोनों कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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