Kanhaiya Lal Murder Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2022 के बहुचर्चित उदयपुर कन्हैयालाल हत्याकांड में पांच आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने विशेष NIA Court के उन आदेशों को बरकरार रखा, जिनमें आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दी गई थीं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामले के पाचों आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है।
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने विशेष NIA कोर्ट के आदेशों के खिलाफ दाखिल आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता और अपराध के प्रभाव को देखते हुए जमानत देने से साफ इनकार किया।
भय का शासन स्थापित करना चाहते थे आरोपी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस अपराध से पैदा हुआ आतंक सिर्फ किसी व्यक्ति के शारीरिक शरीर पर हमला तक सीमित नहीं था। इसके प्रभाव ने देश की संप्रभुता को प्रभावित किया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अपराध का उद्देश्य सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या करना नहीं था, बल्कि कानून के शासन की जगह भय के शासन को स्थापित करना था।
अदालत के मुताबिक, इस तरह की घटना का असर समाज में शांति और कानून-व्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए विशेष NIA कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
क्या था कन्हैयालाल हत्याकांड?
राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को दर्जी का काम करने वाले कन्हैयालाल की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद आरोपियों ने इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किया था। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की। जांच एजेंसी ने इसे आतंक से जुड़ा मामला मानते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
हाईकोर्ट के ताजा फैसले से मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। कन्हैयालाल हत्याकांड की सुनवाई विशेष NIA अदालत में जारी है।
