दिल्ली के द्वारका में हुए एक्सीडेंट मामले में कहा जा रहा है कि एक्सीडेंट करने वाला शख्स नाबालिग है। लेकिन इधर एक चश्मदीद का दावा कुछ और ही है। इधर मृतक में मां ने इसे एक्सीडेंट नहीं, हत्या करार दिया है। चश्मदीद ने जो बड़ा दावा किया है, अगर वह बात सच है तो इस मामले में अब भी काफी कुछ ऐसा है, जो लोगों के सामने नहीं आया है और जांच की जरूरत है।
चश्मदीद का सनसनीखेज दावा है कि शुरुआत में आरोपी परिवार का कोई अन्य सदस्य इस एक्सीडेंट की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार था। उनका कहना है कि वह एक्सीडेंट की जिम्मेदारी लेने को तैयार थे, ताकि असली ड्राइवर 'नाबालिग' को बचाया जा सके।
चश्मदीद के अनुसार, आरोपी का भाई घटनास्थल पर पहुंचा और उसने अपना ड्राइविंग लाइसेंस दिया, ताकि उसके छोटे भाई को बचाया जा सके। वह दिखाने की कोशिश कर रहा था कि ड्राइवर सीट पर उसका छोटा भाई नहीं, बल्कि वह बैठा था। हालांकि, जब पुलिस के सामने इसका विरोध किया गया तो, आखिर आरोपी परिवार ने मान लिया कि असल में गाड़ी 'नाबालिग' ही चला रहा था।
इस घटना के चश्मदीद ने Timesnow को बताया कि एक्सीडेंट बहुत ही भीषण था। कार ने मोटरसाइकिल को बड़ी जोरदार टक्कर मारी थी, जिससे उसके छोटे-बड़े टुकड़े 70 मीटर के दायरे में इधर-उधर बिखर गए। इस मामले की पुलिस गहराई से जांच कर रही है। पुलिस दुर्घटना के सभी तार जोड़ने की कोशिश कर रही है। पुलिस सभी मौजूद सुबूतों को इकट्ठा करके पूरे मामले की तहकीकात कर रही है।
इस एक्सीडेंट में जान गंवाने वाले साहिल की मां इना माकन के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनके दिल में गुस्सा भरा है। उन्होंने बताया कि 3 फरवरी को उनका बेटा ऑफिस जा रहा था। उसी समय एक नाबालिग लड़का अपनी बहन के साथ स्कॉर्पियो में रील बनाने के लिए निकला। इना का आरोप है कि वह लड़का रॉन्ग साइड में गाड़ी चलाकर स्टंट कर रहा था और उसकी रफ्तार इतनी तेज थी कि साहिल को संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा, 'मेरा बेटा अपनी साइड देख रहा था क्योंकि बाईं ओर ई-रिक्शा था, तभी सामने से आ रही स्कॉर्पियो ने उसे टक्कर मार दी। यह महज एक्सीडेंट नहीं, आपराधिक कृत्य है।'
इसी सड़क हादसे में घायल होने के बाद कैब ड्राइवर अजीत सिंह गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि घटना के समय वह लाल बहादुर कॉलेज के पास खड़े होकर सवारी का इंतजार कर रहे थे। तभी पीछे से आई एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे गाड़ी आगे खड़ी बस से जा भिड़ी। वहां बच्चों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें कार से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने टांके लगाने के बाद छुट्टी दे दी, लेकिन 5–6 महीने आराम की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि वह परिवार के इकलौते कमाने वाले हैं और अब वह अपने घर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
