सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी सोमवार 23 मार्च को अहम सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन के महत्वपूर्ण हिस्से के निर्माण में हो रही देरी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विकास कार्यों को चुनाव या त्योहारों के नाम पर टालना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के रुख को संवैधानिक कर्तव्य की पूरी तरह अवहेलना करने और विकास को रोकने की जिद भी करार दिया।
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से गया गया था कि राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कहा गया कि चुनावों के चलते आवश्यक अनुमति देने के लिए मई तक का समय दिया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'हर चीज को राजनीतिक मत बनाइए। यह विकास का मामला है।'
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस जॉय माल्या बागची ने इस दौरान राज्य सरकार की दलील पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, आपके लिए विकास से ज्यादा त्योहार महत्वपूर्ण हैं! यह नहीं कि आप अनुमति देना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह आपका कर्तव्य है। आपने हाईकोर्ट में कहा कि आपको त्योहारों की व्यवस्था करनी है। क्या सार्वजनिक परिवहन की इतनी महत्वपूर्ण परियोजना से ज्यादा त्योहार जरूरी है?
सुनवाई के दौरान अदालत ने आगे कहा कि एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह विकास परियोजनाओं को टालने के लिए इस तरह से कारण गिनाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह परियोजना आचार संहिता लागू होने से पहले की है और इसे रोकने के लिए चुनाव का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि अगर चुनाव आयोग को चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं है, तो राज्य सरकार को भी विकास कार्य रोकने का आधार नहीं मिल सकता है।
