मध्य एशिया में इस समय भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है। अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध जारी है। अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं, जबकि ईरान की तरफ से इजरायल के साथ ही खाड़ी के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह युद्ध इजरायल का है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को जबरदस्ती इसमें घसीट लिया। अब यह युद्ध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए गले की हड्डी बन गया है। नाटो के ज्यादातर देशों ने उनका साथ देने से मना कर दिया है और अमेरिका में भी उनके साथियों ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। इस युद्ध के लिए पेंटागन को जितने धन की जरूरत है, अमेरिकी कांग्रेस से उन्हें यह भी नहीं मिल रही है। डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं, लेकिन उनकी US के 34वें, 41वें और 43वें राष्ट्रपति से गजब की समानता है। यह समानता सिर्फ युद्ध से नहीं है। चलिए जानते हैं -
अमेरिका को ईरान युद्ध में ले गए डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति यानी डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अभी अमेरिका, इजरायल के साथ ईरान में युद्ध लड़ रहा है। अमेरिका और इजरायल का आरोप है कि ईरान परमाणु बम बना रहा था, इसीलिए दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर हमला किया। अमेरिका-इजरायल ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया है। यह युद्ध अब ऊर्जा की लड़ाई बन गया है। एक तरफ ईरान के ऊर्जा क्षेत्रों (तेल और गैस) पर हमले हुए तो दूसरी तरफ ईरान ने भी कतर के LNG प्रोडक्शन साइट पर हमला कर दिया। इससे दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के परमाणु बम बनाने से इजरायल को खतरा हो सकता है। ईरान, इजरायल के लिए खतरा बन सकता है, अमेरिका के लिए नहीं। इसीलिए कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल के बहकावे में आकर अमेरिका को युद्ध में झोंक दिया। बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प 2017 से 2021 तक अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति भी रह चुके हैं।
वियतनाम की लड़ाई में अमेरिका
Dwight D Eisenhower
वियतनाम युद्ध की शुरुआत 1954 में हुई और उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. ऐसेनहावर (Dwight D. Eisenhower) थे, जो देश के 34वें राष्ट्रपति थे। यह युद्ध उत्तरी वियतनाम और दक्षिण वियतनाम के बीच था, जिसमें उनके सहयोगी भी शामिल थे। उत्तर वियतनाम को सोवियत यूनियन और चीन का समर्थन हासिल था, जबकि दक्षिणी वियतनाम को अमेरिका और अन्य कई का समर्थन मिला। वियतनाम को 1954 में आजादी मिली और यह दो हिस्सों में बंट गया। उत्तर और दक्षिण वियतनाम में वर्चस्व की जंग छिड़ी तो अमेरिका ने वहां अपने सैनिक उतार दिए। हालांकि, 1960 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने वहां सैनिकों की संख्या कई गुना बढ़ा दी और फिर 1963 में और सैनिक बढ़ाए। अमेरिका को इस युद्ध में ले गए उनके 34वें राष्ट्रपति ड्वाइट डी. ऐसेनहावर।
1991 का खाड़ी युद्ध
George HW Bush
पहला खाड़ी युद्ध 1991 में शुरू हुआ और उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश (George HW Bush) थे। वह अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति थे। यह युद्ध इराक के खिलाफ लड़ा गया, जिसमें एक तरफ इराक के शासक सद्दाम हुसैन थे तो दूसरी तरफ अमेरिका के नेतृत्व में 42 देशों का संगठन था। साल 1990 में सद्दाम हुसैन ने मात्र दो में कुवैत पर कब्जा कर लिया। कुवैत को इराक के कब्जे से छुड़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश ने अपने देश को इराक के खिलाफ युद्ध में झोंक दिया। 42 देशों के संगठन ने इराक और कुवैत में ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। करीब 6 महीने से ज्यादा समय तक चले इस युद्ध (Operation Desert Storm) के बाद आखिर कुवैत को इराक के कब्जे से मुक्त करा लिया गया। अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश इस युद्ध में अमेरिका को लेकर गए।
जॉर्ज डब्ल्यू बुश के शासन में अफगानिस्तान पर हमला
11 सितंबर यानी 9/11 को अमेरिका पर जबरदस्त आतंकी हमले हुए, जिसने अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। अमेरिका में न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और पेंटागन सहित कुल 11 जगहों पर आतंकी अटैक हुए, जिसमें आतंकवादियों ने नागरिक विमानों को हाईजैक करके उन्हें ही हथियार बना दिया। इन आतंकी हमलों के पीछे तालिबान और अलकायदा थे। अलकायदा का नेतृत्व खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन कर रहा था। अमेरिका के तत्कालीन (43वें) राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (George W Bush) ने तालिबान से आग्रह किया कि तुरंत ओसामा बिन लादेन को उन्हें सौप दिया जाए और अफगानिस्तान में अलकायदा के आतंकी कैंपों को बंद किया जाए। तालिबान ने उनकी बात नहीं मानीं और इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान व अलकायदा के खिलाफ अपनी सेना उतार दी। हालांकि, अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता से बेदखल करके नई सरकार बनवा दी, लेकिन ओसामा बिन लादेन को बाद में बने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासन के दौरान 2 मई 2011 को पाकिस्तान के मिलिट्री एरिया एबटाबाद में मारा गया।
जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अमेरिका को एक और इराक युद्ध झोंका
George w Bush
बात साल 2003 की है। यह वही साल था, जब अमेरिका ने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और पोलैंड की फोर्स के साथ इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (George W Bush) का कहना था कि इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने घातक हथियार (Weapons of Mass Destruction) बना लिए हैं। उनका कहना था कि इराक के पास न्यूक्लियर, कैमिकल और बायोलॉजिकल हथियार हैं, जिससे वह दुनिया में हाहाकार मचा सकते हैं। कथित तौर पर इराक के उन्हीं कैमिकल हथियारों को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इराक के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। हालांकि, इराक के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा जंग शुरू किए जाने से पहले हैंस ब्लिक्स के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र की टीम ने जांच की और उन्हें इराक में कथित घातक हथियार नहीं मिले। जिस तरह से आज डोनाल्ड ट्रंप को अपने नाटो साथियों से समर्थन नहीं मिल रहा है, उसी तरह राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को भी कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और न्यूजीलैंड से समर्थन नहीं मिला था। यहां तक कि सितंबर 2004 में यूएन सेक्रेटरी जनरल कोफी अन्नान ने इराक पर आक्रमण को अवैध और अतंरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था।
इन सभी राष्ट्रपतियों में एक समानता
ड्वाइट डी. ऐसेहावर हों या जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश, जॉर्ज डब्ल्यू बुश और डोनाल्ड ट्रम्प, इन सभी में अमेरिकी राष्ट्रपति होने और अमेरिका को युद्ध में झोंकने के साथ ही एक और बड़ी समानता है। क्या आप जानते हैं वो क्या है? नहीं जानते तो कोई बात नहीं, हम बता देते हैं। यह सभी राष्ट्रपति जो कभी न कभी अमेरिका को युद्ध में ले गए, वह सभी एक ही रिपब्लिकन पार्टी के नेता रहे हैं। यानी जब-जब भी हाल के वर्षों में अमेरिका किसी युद्ध में गया है, तब-तब अमेरिका में कोई रिपब्लिकन राष्ट्रपति रहा है।
