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Delhi News: दिल्ली SIR पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- BLA की जिम्मेदारी सिर्फ फोटो से वोटर की पहचान मिलाने की

Delhi News: दिल्ली में SIR को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने BLA की भूमिका साफ कर दी है। कोर्ट ने कहा कि BLA से हर जानकारी व्यक्तिगत रूप से वैरिफाई करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने SIR में BLA की भूमिका की सीमाएं बताईं

Delhi News: दिल्ली में SIR को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट यानी BLA से गणना प्रपत्र में दर्ज हर जानकारी को व्यक्तिगत रूप से सत्यापित (Verify) करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। BLA की भूमिका मतदाता की पहचान और फॉर्म पर लगी फोटो के मिलान तक सीमित है।

हाईकोर्ट ने यह फैसला चुनाव आयोग की उन गाइडलाइंस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया, जिनमें राजनीतिक दलों के BLA को यह व्यक्तिगत अंडरटेकिंग देने को कहा गया था कि उन्होंने एनुमरेशन फॉर्म (Enumeration Forms) में दर्ज सभी जानकारियों का खुद सत्यापन किया है।

यह याचिका दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और एक अन्य व्यक्ति ने दाखिल की थी। याचिका में चुनाव आयोग की SIR से जुड़ी गाइडलाइंस को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि जनप्रतिनिधित्व कानून या Registration of Electors Rules में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से इस तरह का व्यक्तिगत अंडरटेकिंग मांग सके।

BLA से हर जानकारी के सत्यापन पर सवाल

याचिका में कहा गया था कि BLA से यह अंडरटेकिंग लेना कि उसने Enumeration Form में दर्ज सभी जानकारियों का व्यक्तिगत रूप से सत्यापन किया है, कानून में तय व्यवस्था के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 23 का हवाला दिया। इसके मुताबिक मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने से पहले तथ्यों का उचित तरीके से सत्यापन इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO द्वारा किया जाना है।

याचिका में कहा गया कि नियमों के तहत सत्यापन का यह काम वैधानिक अधिकारियों को करना है, न कि निजी व्यक्तियों या राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को।

‘कानूनी जिम्मेदारी निजी लोगों को नहीं सौंपी जा सकती’

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि BLA से व्यक्तिगत सत्यापन की अंडरटेकिंग लेना एक वैधानिक जिम्मेदारी को निजी लोगों के पास सौंपने जैसा है। याचिका में इसे वैधानिक काम निजी लोगों को सौंपने के बराबर बताया गया। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने SIR की गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की थी।

2002 की वोटर लिस्ट देने की भी मांग

याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग भी की गई थी कि SIR लागू करने से पहले याचिकाकर्ताओं को 2002 की मतदाता सूची की प्रिंटेड और सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई जाए। इसमें ‘Frozen Photo Electoral Roll’ भी शामिल करने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 2002 की वोटर लिस्ट उपलब्ध होने से राजनीतिक दलों के BLA SIR की प्रक्रिया में प्रभावी तरीके से मदद कर सकेंगे।

हाईकोर्ट की टिप्पणी क्यों अहम है?

कोर्ट की टिप्पणी का सीधा मतलब यह है कि राजनीतिक दलों के BLA को SIR के दौरान मतदाता के Enumeration Form में दर्ज हर जानकारी का जांच अधिकारी नहीं बनाया जा सकता। BLA से व्यक्तिगत तौर पर फॉर्म की सभी जानकारियों को सत्यापित करने की अंडरटेकिंग मांगना और उसकी भूमिका को हर विवरण की जांच तक बढ़ाना अलग-अलग बातें हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से कई सवाल उठाए जा रहे हैं।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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