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Noida News: श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी मामले में आकृति चौधरी को राहत, NSA डिटेंशन ऑर्डर रद्द

Noida News: नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी के खिलाफ NSA डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया है, साथ ही यूपी सरकार को उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा दें

Noida News: नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों से जुड़े मामले में आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर को रद्द कर दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान दिया। मामले में सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता अदालत में पेश हुए। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से पुलिस कार्रवाई और NSA के तहत आकृति चौधरी को हिरासत में लिए जाने के आधार से जुड़े सुबूत और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था।

NSA कार्रवाई के समर्थन में ठोस सुबूत नहीं

अदालत के सामने सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से ऐसा कोई ठोस सुबूत पेश नहीं किया जा सका, जिससे आकृति चौधरी के खिलाफ NSA के तहत की गई निरोधात्मक कार्रवाई को न्यायिक कसौटी पर सही ठहराया जा सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर को क्वैश कर दिया।

अदालत ने इससे पहले यह भी जानना चाहा था कि आकृति चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने से पहले उन्हें शांति भंग की आशंका को लेकर कोई नोटिस जारी किया गया था या नहीं। इसके अलावा कथित तौर पर मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और WhatsApp चैट से जुड़े विवरण भी सरकार से मांगे गए थे।

पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं आकृति

याचिका में आकृति चौधरी की तरफ से NSA के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त करने और जमानत दिए जाने की मांग की गई थी। केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों को भी मामले में प्रतिवादी बनाया गया था। बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा की सत्र अदालत आकृति चौधरी की चार में से तीन जमानत अर्जियां खारिज कर चुकी थी, जबकि एक मामले में उन्हें राहत मिली थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीधे जमानत देने से इनकार करते हुए उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।

क्या है आकृति चौधरी का पूरा मामला?

पुलिस के मुताबिक, 13 अप्रैल 2026 को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए मजदूरों के आंदोलन के दौरान आकृति चौधरी ने मजदूरों को भड़काने की कोशिश की थी। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद हिंसा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई थी। इसी मामले में आकृति चौधरी, पत्रकार सत्यम वर्मा सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस ने आकृति चौधरी और सत्यम वर्मा के खिलाफ NSA के तहत भी कार्रवाई की थी।

आकृति चौधरी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस और इलाहाबाद हाईकोर्ट की वकील चार्ली प्रकाश ने पक्ष रखा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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