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'गाड़ी पर गाना नहीं बजता' से लेकर 'कुत्ता पागल हो गया है' तक... जयपुर नगर निगम के 'देसी' शिकायत पोर्टल ने जीता यूजर्स का दिल

Jaipur News: जयपुर नगर निगम का आधिकारिक शिकायत पोर्टल अपनी आसान और बोलचाल की भाषा के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पोर्टल में "गाड़ी पर गाना नहीं बजता" और "कुत्ता बहुत हो गया है" जैसे सीधी भाषा वाले विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।

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नगर निगम का 'देसी' पोर्टल हुआ वायरल (सांकेतिक चित्र)

Jaipur News: सरकारी वेबसाइटों और पोर्टलों पर अक्सर ऐसी जटिल और औपचारिक शब्दावली का इस्तेमाल होता है कि आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने से पहले ही उलझन में पड़ जाते हैं। लेकिन राजस्थान की राजधानी में जयपुर नगर निगम (JMC) के आधिकारिक शिकायत पंजीकरण पोर्टल ने इस पुरानी धारणा को तोड़ते हुए एक अनूठी मिसाल कायम की है। जयपुर नगर निगम का यह पोर्टल अपनी क्लर्क भाषा या कठिन तकनीकी शब्दों के बजाय आम आदमी की रोजमर्रा की 'देसी' और बोलचाल की भाषा के प्रयोग के चलते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

“कुत्ता बहुत हो गया है”... पोर्टल में दिए गए सीधे ऑप्शन

पोर्टल पर ड्रॉपडाउन कैटेगरी में शिकायतों के जो विकल्प दिए गए हैं, वे बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे कोई आम नागरिक अपने दोस्तों से बात करते वक्त अपनी समस्या बताता है। आइए कुछ उदाहरण देखते हैं।

आश्रयहीन और आवारा पशुओं की श्रेणी में विकल्प कुछ ऐसे हैं:

“कुत्ता बहुत हो गया है”

“बंदर बहुत हो गया है”

“सुअर बहुत हो गया है”

“कुत्ता पागल हो गया है, पकड़वाना है”

मृत पशुओं को हटाने संबंधी शिकायतों में भी सीधी भाषा:

“जानवर मर गया है”

“गाय मर गई है”

“बैल मर गया है”

“घोड़ा मर गया है”

“गाय का बच्चा मर गया है”

घर-घर कचरा संग्रहण वाले सेक्शन ने खींचा सबका ध्यान

सबसे ज्यादा चर्चा और प्रशंसा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन वाले सेक्शन की हो रही है। यहां नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए अपनी रोजमर्रा की चिंताओं वाले सटीक विकल्प मिलते हैं, जैसे:

“गाड़ी नहीं आ रही है”

“गाड़ी समय पर नहीं आती है”

“गाड़ी पर गाना नहीं बजता है”

“गाड़ी नहीं रुकती है, तेजी से चली जाती है”

“हेल्पर नहीं आता है”

“गाड़ी वाला पैसे मांगता है”

“हेल्पर कचरा नहीं उठाता है”

Jaipur nagar Nigam Site

कुछ ऐसे दिखते हैं साइट पर ऑप्शन्स

यूजर्स बोले- “सीधी बात, बकवास नहीं”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस पहल के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए यूजर्स नगर निगम और इसके डेवलपर की जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा “काश देश की बाकी सरकारी वेबसाइटें भी इतनी सरल और समझ में आने वाली होतीं।” वहीं दूसरे यूजर ने लिखा “सीधी बात, नो बकवास! नागरिक को शिकायत करने के लिए साइबर कैफे या किसी वकील के पास जाकर कठिन अंग्रेजी या हिंदी सीखने की जरूरत नहीं है।” एक अन्य यूजर ने कहा कि नगर निगम ने धरातल पर आने वाली सबसे ज्यादा शिकायतों का विश्लेषण करके ही ये ड्रॉपडाउन विकल्प तैयार किए हैं।

हर वर्ग के लिए हिंदी और अंग्रेजी का विकल्प

यह पोर्टल सिर्फ पशुओं और कचरा कलेक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सड़क की सफाई, मलबा हटाने और खाली भूखंडों में फैले कचरे जैसी समस्याओं को भी इसी आसान भाषा में दर्ज करने की सुविधा देता है। जब यह कॉन्सेप्ट पहली बार शुरू किया गया था, तब पोर्टल पर हिंदी और अंग्रेजी की मिश्रित शैली था। हालांकि, अब यूजर फ्रेंडली इंटरफेस को और मजबूत करते हुए अंग्रेजी और हिंदी दोनों मिलाकर विकल्प दिए गए हैं, ताकि समाज के हर वर्ग का व्यक्ति बिना किसी परेशानी के अपनी नागरिक समस्याओं की रिपोर्ट दर्ज करा सके। जयपुर नगर निगम का यह अनूठा कदम प्रशासनिक नवाचार की एक बेहतरीन मिसाल बन चुका है, जिसने साबित कर दिया है कि अगर सरकारी तंत्र और जनता के बीच भाषा की खाई खत्म हो जाए, तो व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और सुलभ बन जाती है।

Lakhveer Singh Shekhawat
लखवीर सिंह शेखावतauthor

पत्रकारिता में पिछले सात साल से सक्रिय हैं, वर्तमान में Times Now नवभारत में राजस्थान ब्यूरो हेड हैं। इससे पहले, ज़ी मीडिया और न्यूज़18 नेटवर्क के राजस्थान चैनल के लिए दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया है। उन्होंने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से बीजेएमसी की डिग्री प्राप्त की और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी में डिग्री हासिल की है। राजस्थान से संबंधित समाचारों और ख़बरों पर विशेष पकड़ रखते हैं। साथ ही देश की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं को कवर करने में भी विशेषज्ञता हासिल है।

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