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ED को बड़ी सफलता; फर्जी डिग्री घोटाला मामले में मां-बेटे को कोर्ट ने किया घोषित भगोड़ा

फर्जी डिग्री घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए शिमला की विशेष PMLA अदालत ने आशोनी कंवर और उनके बेटे मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी करार दिया। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया कि मानव भारती यूनिवर्सिटी के नाम पर डिग्रियां बेचकर करोड़ों की अवैध कमाई की गई। अदालत ने ED की अर्जी पर 3 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए मां-बेटे के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए।

Shimla PMLA Court Declares Mother–Son Duo Fugitive in Fake Degree Scam

शिमला PMLA कोर्ट ने फर्जी डिग्री स्कैम में मां-बेटे की जोड़ी को भगोड़ा घोषित किया

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Shimla News: फर्जी डिग्री घोटाले से जुड़े मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए शिमला स्थित विशेष PMLA अदालत ने आशोनी कंवर और उनके बेटे मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया। यह फैसला 3 जनवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर की गई अर्जी पर सुनाया गया।

ED ने यह जांच हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के धर्मपुर थाना क्षेत्र में दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी आशोनी कंवर, बेटे मनदीप राणा और बाकी सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी डिग्रियों का एक बड़ा रैकेट खड़ा किया था। एजेंसी के अनुसार, मानव भारती यूनिवर्सिटी, सोलन के नाम का इस्तेमाल करते हुए एजेंटों और छात्रों से रकम ली जाती थी और बदले में उन्हें नकली डिग्रियां उपलब्ध करवाई जाती थीं।

कई राज्यों में संपत्तियां खरीदीं

इस गैरकानूनी कारोबार से लगभग 387 करोड़ रुपये अर्जित किए गए, जिन्हें अपराध से हुई कमाई (Proceed of Crime) की श्रेणी में रखा गया है। जांच के दौरान पता चला कि इसी काली कमाई का इस्तेमाल करते हुए राज कुमार राणा, उनकी पत्नी आशोनी कंवर और बेटा मनदीप राणा ने देश के कई राज्यों में चल-अचल संपत्तियां खरीदीं। ये संपत्तियां उन्होंने अपने नाम, परिजनों और उनसे जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के नाम पर दर्ज कराईं। अब तक प्रवर्तन निदेशालय करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त (अटैच) कर चुका है, और PMLA की न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority ने इस कार्रवाई को मंजूरी भी दे दी है।

14 लोगों और 2 संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट हुई थी दाखिल

इस मामले में इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत 14 व्यक्तियों और 2 संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की थी, जिसमें राज कुमार राणा, आशोनी कंवर और मनदीप राणा के नाम भी शामिल थे। शिमला स्थित विशेष अदालत ने 4 जनवरी 2023 को इस चार्जशीट का संज्ञान लिया और आशोनी कंवर तथा मनदीप राणा को तलब करने के लिए समन जारी किए। लेकिन दोनों आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद, 4 नवंबर 2023 को अदालत ने उनके खिलाफ खुले अंत (ओपन-एंडेड) गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 की धारा

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद ही दोनों आरोपी भारत से निकलकर ऑस्ट्रेलिया चले गए और वहीं रहना शुरू कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने कई बार नोटिस भेजकर उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने न तो जांच में सहयोग किया और न ही देश वापस आकर अदालत की कार्यवाही का सामना करने पर सहमति जताई। इसी के बाद ED ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की धारा 4 के तहत आवेदन दायर किया। शिमला की विशेष अदालत ने इस अर्जी को स्वीकार करते हुए 3 जनवरी 2026 को मां-बेटे को आधिकारिक रूप से भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया।

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अनुज मिश्रा
अनुज मिश्रा author

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं।... और देखें

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