कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। हादसे में 11 लोगों की मौत और पांच लोगों के घायल होने के बाद अब जांच का दायरा फैक्ट्री के संचालन से लेकर विस्फोटक सामग्री के भंडारण और सुरक्षा मानकों तक पहुंच गया है। पुलिस ने फैक्टरी संचालक आदिल समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं,आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमों का गठन किया गया है।
मृतकों के नाम
- प्रियांजलि
- प्रवीण सिंह
- जाह्नवी
- आदित्य
- रवि
- ज्ञान सिंह
- आदित्य
- अंजू
- विक्रम सरोज
- अंश
- नन्हा
आदिल समेत छह लोगों पर मुकदमा
पुलिस अधीक्षक सतनारायण प्रजापत के मुताबिक, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं के तहत अभियोग दर्ज किया जा रहा है। शुरुआती जांच में फैक्ट्री संचालक आदिल समेत छह लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।
फैक्टरी और गोदाम को ध्वस्त करने की कार्रवाई
विस्फोट के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री परिसर में रखी पटाखा सामग्री को जब्त कर उसे नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जेसीबी की मदद से क्षतिग्रस्त फैक्ट्री को भी ध्वस्त किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि कोई व्यक्ति उसमें फंसा न रह गया हो। फैक्ट्री से सटे पांच-छह घर भी विस्फोट के कारण ढह गए हैं। आसपास की इमारतों को हुए नुकसान का भी प्रशासन आकलन कर रहा है।पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद फैक्ट्री के संचालन और स्थानीय स्तर पर निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री का भंडारण और पटाखों का निर्माण किस तरह किया जा रहा था और इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर किस-किस अधिकारी को थी। पुलिस प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर लापरवाही की भी जांच की जा रही है। दोष सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की भी होगी जांच
जांच में अब यह भी देखा जा रहा है कि पटाखा फैक्टरी के पास वैध लाइसेंस था या नहीं और वहां विस्फोटक सामग्री रखने तथा पटाखे बनाने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फैक्ट्री में आग से बचाव, विस्फोटक सामग्री के भंडारण और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की भी जांच होगी। पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विस्फोट आखिर किस वजह से हुआ। इसके लिए घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और विस्फोट के संभावित कारणों की पड़ताल की जा रही है।
एनडीआरएफ-एसडीआरएफ का बचाव अभियान जारी
विस्फोट के बाद घटनास्थल पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। पुलिस और दमकल विभाग के जवान भी अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका को देखते हुए तलाशी अभियान जारी रखा गया है। दमकल विभाग ने फैक्टरी में लगी आग पर काबू पा लिया है। घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है ताकि बचाव अभियान के दौरान किसी तरह की दूसरी घटना न हो।रेल यातायात भी हुआ था प्रभावित
विस्फोट की गंभीरता का असर रेल यातायात पर भी पड़ा। घटनास्थल के बगल से गुजर रही दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन पर करीब एक घंटे तक ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा। घटनास्थल के पास पहुंची अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस को मनौरी रेलवे स्टेशन वापस भेज दिया गया, जबकि दिल्ली से वाराणसी जा रही वंदे भारत ट्रेन को सैयद सरावा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया था। हालात नियंत्रित होने के बाद रेल यातायात बहाल कर दिया गया।
घायलों का प्रयागराज में इलाज
हादसे में गंभीर रूप से घायल पांच लोगों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिला प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये की मदद
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पीड़ित परिवारों से संपर्क कर उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने और घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
इन बातों की हो रही जांच
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि पटाखा फैक्ट्री में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री कैसे रखी गई और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि फैक्ट्री किस अनुमति और लाइसेंस के तहत चल रही थी, विस्फोट की असली वजह क्या थी और इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
