राँची

फर्जी नक्सली सरेंडर मामला : युवकों को नक्सली घोषित कर कराया सरेंडर, झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

याचिका में दावा किया गया है कि झारखंड के 514 युवाओं को फर्जी तौर पर नक्सली घोषित कर उनका सरेंडर कराया गया, ताकि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी उपलब्धि दिखा सकें और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष पुरस्कार प्राप्त कर सकें।

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झारखंड हाईकोर्ट (फोटो-ट्विटर)

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को आदिवासी युवाओं को नक्सली बताकर फर्जी सरेंडर कराए जाने से जुड़े मामले की जनहित याचिका पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर तय की है। यह जनहित याचिका झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की ओर से दाखिल की गई है।

514 युवाओं को फर्जी तौर पर नक्सली घोषित कर उनका सरेंडर कराया

न्यूज एजेंसी आईएनएस के हवाले से याचिका में दावा किया गया है कि झारखंड के 514 युवाओं को फर्जी तौर पर नक्सली घोषित कर उनका सरेंडर कराया गया, ताकि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी उपलब्धि दिखा सकें और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष पुरस्कार प्राप्त कर सकें।

याचिका में यह भी कहा गया है कि युवाओं को सीआरपीएफ में नौकरी दिलाने का लालच दिया गया था। इसके लिए राज्य सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए खर्च किए गए। पूर्व में इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के गृह सचिव को युवाओं के सरेंडर संबंधी तथ्यों पर सीलबंद रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने यह भी पूछा था कि क्या जिन युवाओं को नक्सली बताकर सरेंडर कराया गया, उन्हें वास्तव में रांची के पुराने जेल परिसर में प्रशिक्षण दिलाया गया था और यदि हां, तो क्या वह प्रशिक्षण कानूनी रूप से वैध था? इस कथित फर्जी सरेंडर प्रकरण में दिग्दर्शन कोचिंग इंस्टीट्यूट का नाम सामने आया था।

आरोप है कि इस संस्थान ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से 514 छात्रों को नक्सली घोषित कर सरेंडर कराया। पुलिस की आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन युवाओं में से केवल 10 के ही नक्सली गतिविधियों से संबंध पाए गए। जांच दल ने 128 युवाओं के बयान दर्ज किए, जिनमें से अधिकांश के पते की पुलिस सत्यापन नहीं कर पाई या वे उन पतों पर मिले ही नहीं। जांच प्रक्रिया अधूरी रहने के बावजूद, मामले को बंद कर दिया गया था।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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