Ram Temple in Indore: अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समारोह में अब केवल एक दिन का समय शेष रह गया है। इस दौरान पूरा भारत राम नाम जप रहा है। ऐसे में इंदौर को कैसे भूला जा सकता है। भले ही राम जी का आगमन अयोध्या में हो रहा हो लेकिन राम के नाम का प्रकाश इंदौर को कई सौ वर्षों से आलोकित कर रहा है। इंदौर को अहिल्या की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां कई प्राचीन मंदिर स्थित है, जहां रामायण की संपूर्ण गाथा चित्रों में अंकित की गई है। ये सभी अनूठे मंदिर आपको राम युग की गौरव गाथा सुनाते हैं। आइए प्राण प्रतिष्ठा से पहले इंदौरा यानी देवी अहिल्या की नगरी के प्राचीन राम मंदिरों के बारे में जानें...
खातीपुरा राम मंदिर
350 वर्षों से माता जानकारी और भाई लक्ष्मण से साथ प्रभु श्रीराम यहां दर्शन देते आए हैं। उनकी मनमोहक प्रतिमा के दर्शन करने के लिए हजारों भक्तों की यहां लंबी लाइन लगती है। हाल ही में इस मंदिर के नए स्वरूप का कार्य पूरा हुआ है। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के साथ यहां 27 जनवरी को होने वाली सात दिन की प्राण प्रतिष्ठा की भी उत्साह देखने को मिलेगा।
पंचकुइया राम मंदिर
पंचकुइया में स्थित राम मंदिर में 300 वर्ष पहले प्रभु श्रीराम के बालक स्वरूप की प्रतिष्ठा की गई थी। मंदिर में स्थित श्री राम की मूर्ति श्यामवर्ण है। आश्रम द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभु श्री राम की मूर्ति की प्रतिष्ठा राम नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र में की गई थी। इस मंदिर में भी 22 जनवरी को रामोत्सव मनाया जाएगा।
निरालाधाम राम मंदिर
इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1990 में हुआ था। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि इसकी नींव, दीवारों पर भक्तों द्वारा जय श्रीराम नाम लिखे पत्रक डाले गए हैं। मंदिर के हर कोने में लाल रंग से जय श्री राम लिखा गया हुआ है। निरालाधाम राम मंदिर में भक्तों की अटूट श्रद्धा को प्रदर्शित करता है।
लाल मंदिर, जूनी क्षेत्र
इंदौर के अनूठे और प्राचीन राम मंदिर की बात आए और लाल मंदिर का जिक्र न हो ऐसा नहीं हो सकता। इंदौर इकलौता ऐसा शहर है, जहां राम-लक्ष्मण की मूछों वाली प्रतिमाएं विराजमान है। इस मंदिर की निर्माण 1888 में लाल पत्थरों से किया गया था, इसलिए इसका नाम लाल मंदिर के नाम पर पड़ा। मंदिर में राम, सीता और लक्ष्मण के साथ राधा कृष्ण और गणेशजी की प्रतिमाएं भी विराजमान है।
