दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (दिल्ली यूनिट) ने 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकार के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। दोनों पत्रकार संगठनों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एसीपी विवेक भगत पर युवा महिला पत्रकार के साथ अनुचित तरीके से बॉडी को पकड़ने का आरोप है।
संगठनों का दावा है कि जब पत्रकार ने इसका विरोध किया तो अधिकारी वहां से चले गए। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने की बात भी कही गई है। बयान के अनुसार, पत्रकार पिछले दो दिनों से इस कथित हमले को लेकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
पत्रकार संगठनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की भी आलोचना की है। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस का व्यवहार बेहद कठोर था और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला माना जाना चाहिए। संगठनों के अनुसार, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल होने के बावजूद वहां किसी भी तरह की सभा की अनुमति नहीं दी गई। कई पुरुष और महिला पत्रकारों ने कैमरे पर पुलिस की ओर से कथित उत्पीड़न और प्रदर्शन की कवरेज रोकने के लिए धमकियां दिए जाने की शिकायत की है।
बयान में कहा गया है कि कई पत्रकारों से प्रेस कार्ड दिखाने के लिए कहा गया। जब पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों से सवाल किया कि उनके नाम वाले पहचान बैज क्यों नहीं लगे हैं, तो कथित तौर पर पुलिस के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
पत्रकार संगठनों ने पत्रकारों से प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के पहचान पत्र की मांग को भी अनुचित बताया है। उनका कहना है कि PIB कार्ड आम तौर पर संसद और मंत्रालयों को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को जारी किए जाते हैं। शहरों में काम करने वाले कई रिपोर्टर PIB कार्ड के पात्र नहीं होते और स्वतंत्र पत्रकारों को भी ऐसे कार्ड आमतौर पर नहीं मिलते। संगठनों के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि इन पत्रकारों को किसी सार्वजनिक बैठक या सड़क पर हो रहे प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करने का अधिकार नहीं है।
DUJ ने राजधानी में पत्रकारों पर बढ़ते कथित हमलों पर चिंता जताई है। संगठन ने सितंबर में साकेत पुलिस थाने में दो महिला पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और उनके साथ मारपीट किए जाने की घटना का भी जिक्र किया। संगठन का कहना है कि अपना काम कर रहे मीडिया कर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती है।
DUJ ने दिल्ली में बढ़ती कथित कानून-व्यवस्था की समस्या और पुलिस की जवाबदेही की कमी पर भी सवाल उठाया है। संगठन ने पत्रकारों पर हुए कथित हमलों की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।
बयान के अंत में पत्रकार संगठनों ने सवाल उठाया, “अगर प्रेस भी सुरक्षित नहीं है, तो कौन सुरक्षित है?”
