छत्तीसगढ़ में ऐसे कई देवी मंदिर हैं, जहां मां भगवती दुर्गा माता की पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन रायपुर में एक ऐसा मंदिर भी है, जिसकी प्रसिद्ध देशभर में फैली हुई है। इस मंदिर को कंकाली माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है। यहां के महामाया मंदिर और दंतेश्वरी मंदिर की तरह ही मां कंकाली का मंदिर काफी प्राचीन और अद्भुत है। इस मंदिर से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी है।
कहा जाता है कि मां कंकाली मंदिर में प्रतिमा पहले मंदिर के पीछे मठ में विराजमान थी। जिसके बाद मंदिर का निर्माण होने पर प्रतिमा को मंदिर में स्थापिक किया गया। लेकिन इस मठ को साल में एक बार सिर्फ दशहरा के दिन खोला जाता है। बताया जाता है कि यहां अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं, हर साल दशहरा के दिन इनकी पूजा की जाती है।
सिर्फ इस दिन होती है पूजा
इस दिन माता के दर्शन के लिए रायपुर और आस-पास के जिलों से लोग बड़ी संख्या में कंकाली मंदिर पहुंचते हैं। सुबह 6 से रात 12 बजे तक पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि कंकाली माता प्रकट होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। कंकाली मंदिर में प्रसाद के रूप में सोनपत्ती चढ़ाई जाती है। पूजा सामग्री अर्पित कर माता रानी की पूजा करते हैं, जिसके बात रात 12 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।
मां कंकाली के शस्त्रों की पूजा
विजयादशमी पर मां कंकाली मंदिर में शस्त्रों की पूजा की जाती है, जिसके बाद लोग देवी के दर्शन करते हैं। आमतौर पर सभी मंदिरों में रोज माता कि पूजा होती है, लेकिन कंकाली मंदिर में केवल दशहरा के दिन माता की अराधना की जाती है, जिसके बाद सालभर के लिए बंद कर दिया जाता है।
