गोवा में 'कैसीनो सिटी' का स्थानीय लोग क्यों कर रहे विरोध? विपक्ष ने उठाए सवाल
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Mar 15, 2026, 01:34 PM IST
गोवा में कैसीनो उद्योग को लेकर लंबे समय से चल रही बहस को फिर से तेज कर दिया है। राज्य में पहले से ही मांडोवी नदी पर कई ऑफशोर कैसीनो संचालित होते हैं और इन्हें लेकर समय-समय पर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध भी होता रहा है।
(सांकेतिक फोटो-Istock)
गोवा : उत्तरी गोवा के धारगालिम इलाके में स्थित कृषि भूमि पर एक बड़े एकीकृत रिसॉर्ट के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। यह परियोजना भारत की एकमात्र सूचीबद्ध कैसीनो गेमिंग कंपनी डेल्टा कॉर्प लिमिटेड से जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि, राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत इस प्रस्ताव को निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्ष और स्थानीय निवासी इसे खेती के लिए आरक्षित जमीन पर 'कैसिनो सिटी' बसाने करने का प्रयास बता रहे हैं। राज्य के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।
दरअसल, विवाद की जड़ 1997 में लागू हुए गोवा कमांड एरिया डेवलपमेंट एक्ट से जुड़ी है। यह कानून सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े कृषि क्षेत्रों की रक्षा के लिए बनाया गया था। इनमें प्रमुख है Tillari Irrigation Project, जिसे गोवा और महाराष्ट्र ने मिलकर करीब 1,465 करोड़ रुपये की लागत से बनाया था, ताकि क्षेत्र में कृषि को स्थिर पानी मिल सके।
धारगालिम की करीब 3.65 लाख वर्ग मीटर (लगभग 90 एकड़) जमीन लंबे समय तक इसी संरक्षित सिंचाई कमांड एरिया का हिस्सा रही। यहां भूमि उपयोग बदलने के सख्त नियम लागू थे, लेकिन 2024 के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। गोवा निवेश प्रोत्साहन एवं सुविधा बोर्ड (IPB) ने डेल्टा कॉर्प के एक बड़े परिसर के प्रस्ताव पर विचार किया, जिसमें होटल, कन्वेंशन सेंटर, वाटर पार्क और गेमिंग सुविधाएं शामिल हैं। परियोजना को संभव बनाने के लिए सरकार ने इस जमीन को टिलारी कमांड एरिया से हटाने की प्रक्रिया शुरू की। फरवरी 2026 की अधिसूचना में कमांड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड (CADB) ने मुआवजा शुल्क के भुगतान की शर्त पर इस जमीन को सिंचाई क्षेत्र से बाहर रखने पर सहमति जताई। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया बेहद तेज और अपारदर्शी तरीके से पूरी की गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया और न्यूज 18 की रिपोर्ट के हवाले से इस मुद्दे ने गोवा में कैसीनो उद्योग को लेकर लंबे समय से चल रही बहस को फिर से तेज कर दिया है। राज्य में पहले से ही मांडोवी नदी पर कई ऑफशोर कैसीनो संचालित होते हैं और इन्हें लेकर समय-समय पर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से विरोध भी होता रहा है।
मुख्यमंत्री सावंत ने दी सफाई
विधानसभा में सामने आए वित्तीय विवरणों के अनुसार, परियोजना डेवलपर ने भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए लगभग 28 करोड़ रुपये का रूपांतरण शुल्क जमा किया है। मुख्यमंत्री सावंत ने कहा कि पहले से दिए गए उच्च शुल्क को देखते हुए यह छूट उचित है, लेकिन विपक्षी विधायक कार्लोस अल्वरेस फ़ेरीरा ने इसे 'पक्षपातपूर्ण सौदा' बताया है।
विपक्ष का क्या है तर्क
फरेरा का तर्क है कि कैबिनेट को कमांड एरिया डेवलपमेंट बोर्ड को दी गई। वैधानिक शक्तियों को दरकिनार करने का अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि किसानों के जल अधिकारों की रक्षा के लिए अधिसूचित भूमि को हटाना अवैध हो सकता है और इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। फिलहाल सरकार ने फरवरी 2026 की अधिसूचना पर सार्वजनिक आपत्तियां आमंत्रित की हैं और लोगों को 30 दिन के भीतर अपनी राय देने का मौका दिया है। हालांकि IPB की सिफारिश और फीस जमा होने के बाद कई स्थानीय लोगों को लगता है कि परियोजना को मंजूरी मिलना लगभग तय है।
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