पटना

Indo-Nepal Border Road: खत्म होगी दो देशों के बीच दूरियां, बनने वाली है 552 KM लंबी इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क

Indo-Nepal Border Road: भारत और नेपाल के बीच परिवहन सेवा को सुगम बनाने के लिए बॉर्डर तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस कॉरिडोर के जरिए नेपाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बंगाल पहुंचने में आसानी होगी और समय की भी बचत होगी। आइये जानते हैं इस परियोजना से किन राज्यों को सीधा फायदा होने वाला है?

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इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Indo-Nepal Border Road: भारत और नेपाल के बीच बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। पड़ोसी देश होने के नाते दोनों देशों के लोग व्यापार, घूमने फिरने या अन्य कामकाज के वास्ते ट्रैवेल करते हैं। लिहाजा, भारत सरकार (Central Government) और राज्य सरकार (State Government) के सहयोग से यात्रा को सुगम बनाने के लिए इंडो-नेपाल बॉर्डर तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, निर्माण कार्य को इसी साल दिसंबर माह तक पूरा कर लिया जाएगा। खासकर, इस रोड के जरिए बिहार के सात जिलों को सीधे तौर पर फायदा होने वाला है। इसके अतिरिक्त तीन राज्यों का पड़ोसी देश नेपाल से सीधा कनेक्शन हो जाएगा। इस सड़क के खुलने से नेपाल, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), उत्तराखंड (Uttrakhand) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) पहुंचने में कम समय लगेगा। बिहार में इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क के करीब 375 किमी. हिस्से का निर्माण करीब 2300 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। हालांकि, सड़क के 178 किमी. हिस्से का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है। इस लिहाज से इस सड़क की कुल लंबाई 552 किमी. होगी। आइये जानते हैं इस सड़क मार्ग के जरिए किन राज्यों के साथ किन-किन जिलों के लोगों को सीधे तौर पर फायदा होने वाला है?

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इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क रूट मैप (Indo Nepal Border Road Route Map)

सड़क निर्माण का कार्य अपने अंतिम चरण में है। 90 फीसदी कार्य के पूरा होने की जानकारी है। जानकारी के मुताबिक, इस सड़क का निर्माण साल 2013 से जारी था, इसके बाद कार्य में काफी सुस्ती देखी गई, लेकिन वर्तमान में कार्य को तेजी से संपादित करने की तैयारी चल रही है। अब महज फिनिशिंग का कार्य शेष है। अगर, तय समय में कार्य पूरा होता है तो इसके दिसंबर माह तक खुलने के आसार हैं। इसके संचालित होने से बिहार के सात जिलों को सीधे कनेक्टिविटी मिलेगी। इसमें पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इस पूरे कॉरिडोर पर 121 छोटे बड़े पुलों का निर्माण होना था, जिसमें 119 कंपलीट हैं, जबकि दो निर्माणाधीन पुलों को अंतिम टच दिया जा रहा है।

बिहार के सात जिलों से गुजरेगी इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क

  • पश्चिमी चंपारण
  • सीतामढ़ी
  • मधुबनी
  • सुपौल
  • अररिया
  • किशनगंज
इस सड़क का निर्माण होने से बॉर्डर के किनारे बसे गांव, कस्बों में आर्थिक समृद्धि (Economic Prosperity) के द्वार खुलेंगे। साथ ही सीमावर्ती इलाकों में यातायात की सुविधा भी बेहतर होगी। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार और नेपाल लगभग 729 किलोमीटर सीमा साझा करते हैं, जिसमें 552 किमी. सड़क मार्ग के जरिए कवर की जा रही है। वैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में 1372 किमी. सड़क का निर्माण होना है। बिहार में यह पश्चिम चंपारण के मदनपुर से शुरू होकर रक्सौल, बैरगनिया, सुप्पी, सोनबरसा, परिहार, सुरसंड से गुजरते हुए जयनगर, सुपौल में बीरपुर, अररिया में सिकटी से किशनगंज के गलगलिया तक कवर करेगी।
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जानकारीविवरण
सड़क का नाम इंडो-नेपाल बॉर्डर सड़क
सड़क की लंबाई 552 किमी.
परियोजना की लागत 2300 करोड़ रुपये
किन राज्यों को फायदा यूपी, उत्तराखंड, बिहार
सड़क पर पुलों की संख्या121
निर्माणकर्ता कंपनी भारत सरकार/राज्य सरकार
कार्य पूरा होने की तिथि दिसंबर 2024
इस कॉरिडोर के विकसित होने से बॉर्डर के किनारे बसे तमाम गांवों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका संपर्क बेहतर होगा। विकास के साथ रोजगार (Employment) के अवसर भी खुलेंगे। इसके अतिरिक्त सड़क के किनारे ढाबे, रेस्टोरेंट, बाजार, उद्योग धंधो को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार के भी रास्ते सुगम होंगे। ऐसा माना जा रहा है कि इस सड़क मार्ग के बनने से तस्करी (Smuggling)पर भी लगाम लगेगा और अतरराष्ट्रीय अपराध (International Crime)पर भी शिकंजा कसा जा सकेगा।
Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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