Noida Protest: नोएडा के थाना फेस-2 पुलिस को सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने और औद्योगिक क्षेत्र में दंगा भड़काने की कोशिश करने वाले एक बड़े वांटेड अपराधी को पकड़ने में बड़ी सफलता मिली है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान अनिल कुमार के रूप में हुई है, जो सोशल मीडिया पर खुद को उत्तर प्रदेश पुलिस के एक DCP का ड्राइवर बताकर मजदूरों के बीच भ्रम और हिंसा फैला रहा था। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।
हनुमान मंदिर के पास से हुई गिरफ्तारी
नोएडा पुलिस कमिश्नरेट के मीडिया सेल द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, थाना फेस-2 पुलिस को 20 मई को एक गोपनीय इनपुट मिला था। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने जाल बिछाकर फेस-2 क्षेत्र में स्थित मदरसन कंपनी के पीछे, हनुमान मंदिर के पास से आरोपी अनिल कुमार (पुत्र ब्रह्मपाल) को दबोच लिया। 32 वर्षीय आरोपी अनिल कुमार मूल रूप से हापुड़ जिले के बाबूगढ़ छावनी थाना क्षेत्र के मुक्तेशरा गांव का रहने वाला है। वह वर्तमान में नोएडा के फेस-2 थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 'नया गांव' में किराये का कमरा लेकर रह रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ा-लिखा है।
DCP का ड्राइवर होने का दावा पूरी तरह झूठा: नोएडा पुलिस
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो और कई पोस्ट तेजी से वायरल हो रही थीं। इन पोस्ट्स में यह मनगढ़ंत दावा किया जा रहा था कि अनिल कुमार यूपी पुलिस का एक सरकारी कर्मचारी है और किसी DCP का आधिकारिक ड्राइवर है। पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने जानबूझकर अनिल को “रिचा ग्लोबल नोएडा” नामक एक बड़े व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल कराया था ताकि वह अंदर की खबरें दे सके और आंदोलन को हिंसक बना सके। नोएडा पुलिस ने इस पूरे नैरेटिव और दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अनिल कुमार का यूपी पुलिस या किसी सरकारी विभाग से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। वह कभी भी किसी पुलिस अधिकारी का ड्राइवर नहीं रहा। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में साफ हुआ है कि वह दिल्ली में एक निजी संस्था से जुड़े व्यक्ति का महज एक प्राइवेट ड्राइवर है।
'मोदी आ रहा है, पूरा रोड जाम कर देना'... व्हाट्सऐप चैट से खुली पोल
पुलिस जांच और साइबर सेल की स्क्रूटनी में यह बात भी सामने आई है कि अनिल कुमार का वर्तमान में 'रिचा ग्लोबल' कंपनी से कोई कामकाजी संबंध नहीं है; वह करीब दो साल पहले इस कंपनी में एक साधारण कर्मचारी के रूप में काम करता था। जिस व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए यह प्रोपेगेंडा और हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही थी, उसके कुछ सदस्यों ने भी पुलिस के सामने यह स्वीकार किया है कि अनिल कुमार लगातार ग्रुप में भड़काऊ और हिंसक संदेश डाल रहा था। पुलिस को मिले चैट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, आरोपी ने ग्रुप में "मोदी आ रहा है, बाईपास का उद्घाटन करने के लिए, पूरा रोड जाम कर देना चाहिए" जैसे खतरनाक और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले संदेश भेजे थे।
मजदूर आंदोलन की आड़ में रची गई थी गहरी साजिश
नोएडा पुलिस का साफ कहना है कि गौतमबुद्धनगर पुलिस के किसी अधिकारी या कर्मी ने अनिल को उस ग्रुप में ऐड नहीं किया था। बल्कि, मजदूर आंदोलन की आड़ में शहर का माहौल खराब करने और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की साजिश रचने वाले उसी व्हाट्सएप ग्रुप के ही एक सक्रिय सदस्य ने अनिल को ग्रुप में जोड़ा था। पुलिस को इस मामले में कुछ बेहद अहम और संवेदनशील सुराग हाथ लगे हैं। इस प्रोपेगेंडा के पीछे और कौन से बड़े चेहरे या संगठन शामिल हैं, इसकी गहराई से जांच करने के लिए पुलिस की कई टीमें जुटी हुई हैं।
