Noida News: नोएडा में एक बार फिर सुरक्षा इंतजामों की कमी ने एक परिवार से उसका मासूम बच्चा छीन लिया। थाना सेक्टर-113 क्षेत्र के सेक्टर-123 में पर्थला गोलचक्कर के पास झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में बनी एक खुले पंप की हौद में गिरने से चार वर्षीय बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया, वहीं स्थानीय लोगों में नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है। जानकारी के मुताबिक, मृतक बच्चे की पहचान फिरोज आलम उर्फ गोलू, पुत्र मुराजुद्दीन, निवासी ग्राम खर्तौना, थाना अटरिया, जनपद सीतापुर के रूप में हुई है। उसकी उम्र महज करीब चार साल थी। बताया जा रहा है कि बच्चा पानी पीने के लिए गया था। इसी दौरान वह सेक्टर-123 में बनी पंप की हौद में जा गिरा। हौद खुली होने के कारण मासूम को संभलने या बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिल सका।
प्राधिकरण पर जवाबदेही तय करने की मांग
हादसे की सूचना मिलते ही थाना सेक्टर-113 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने बच्चे को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक मासूम की जिंदगी बचाने की तमाम कोशिशें कुछ ही देर में उसके परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गईं। परिजनों का आरोप है कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। उनका कहना है कि खुली हौद को न तो सुरक्षित तरीके से ढका गया था और न ही उसके आसपास ऐसी व्यवस्था की गई थी, जिससे बच्चों और स्थानीय लोगों को खतरे से बचाया जा सके। परिवार ने इस घटना के लिए नोएडा प्राधिकरण की गंभीर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
नोएडा में यह पहला हादसा नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में खुले गड्ढे, नाले और अन्य असुरक्षित स्थान लंबे समय से चिंता का विषय बने हुए हैं। बारिश के मौसम में ऐसे स्थान और भी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। लोगों का सवाल है कि अगर सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की खुली हौद और गड्ढे मौजूद हैं, तो उनकी नियमित निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ महीनों के दौरान खुले गड्ढों और नालों में गिरने से लोगों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में चार साल के मासूम की मौत ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर कौन है जिम्मेदार?
पुलिस के अनुसार, घटना 31 जुलाई 2026 की है। पुलिस ने मृतक के पंचनामा सहित आवश्यक कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों द्वारा बच्चे का अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है। थाना सेक्टर-113 पुलिस ने मामले में अभियोग पंजीकृत कर लिया है और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मासूम की मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या हादसे के बाद सिर्फ जांच और कार्रवाई तक मामला सीमित रहेगा या नोएडा प्राधिकरण ऐसे खुले और खतरनाक स्थानों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम भी उठाएगा? एक मासूम की जान जाने के बाद उठे ये सवाल आने वाले दिनों में नोएडा की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
अब तक हो चुके हैं इतने हादसे
जनवरी 2026 में सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार बेसमेंट निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे में जमा पानी में जा गिरी थी। हादसे के बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, लेकिन पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण युवराज को बचाया नहीं जा सका। इसके करीब एक महीने बाद अल्फा-1 सेक्टर स्थित रेलवे विहार में गंगाजल पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढे में रात के समय एक कार गिर गई। इस स्थान पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई थी और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड या रोशनी की व्यवस्था थी। हालांकि, इस हादसे में कार सवार की जान बच गई।8 अप्रैल को नोएडा के सेक्टर-94 में भी एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां बने गड्ढे में डूबने से एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र हर्षित की मौत हो गई। इसके बाद 9 जुलाई को सेक्टर-58 में इंजीनियर आर्यन करंट की चपेट में आने के बाद खुले नाले में जा गिरा। पानी में डूबने के कारण उसकी जान चली गई। हाल ही में ग्रेटर नोएडा में भी पांच साल के बच्चे की गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। इससे पहले पिछले साल 17 जून को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौराहे पर अंडरपास निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे में मोटरसाइकिल गिरने से अंकुर सिंह और कशिश की मौत हो गई थी। 14 जुलाई को सेक्टर-93 में सीवर मेनहोल में उतरकर सफाई करने के दौरान एक सफाईकर्मी की जान चली गई। वहीं, सेक्टर-150 स्थित एल्डिको लाइव सोसायटी में एसटीपी टैंक की सफाई के लिए बिना जरूरी सुरक्षा उपकरणों के उतरे दो सफाईकर्मियों की भी मौत हो गई।
