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कल्याण बिगहा के ‘मुन्ना’ का सफर : शुरुआती हार के बाद 10 बार CM, अब राज्यसभा... Nitish Kumar की पूरी सियासी कहानी

Nitish Kumar बिहार की राजनीति में अब तक के संभवत: सबसे बड़ा चेहरा हैं। आज वह राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ले रहे हैं। चलिए जानते हैं नीतीश कुमार का पूरा राजनीति करियर कैसे आगे बढ़ा है।

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नीतीश कुमार आज राज्य सभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे

Nitish Kumar Rajya sabha Oath: आज का दिन बिहार की राजनीति के लिए बहुत ही खास है। बिहार में सबसे ज्यादा 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का आज मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार से नाता खत्म होने जा रहा है। हालांकि, आज वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, लेकिन उसी तरफ आज उन्होंने एक अहम कदम बढ़ा दिया है। हाल ही में उन्होंने राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज की और उसके बाद राज्य विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया था। अब आज यानी शुक्रवार 10 अप्रैल को वह दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे। बिहार का 'मुन्ना' अब दिल्ली में देश की राजनीति करेगा। चलिए इस अवसर पर उनके राजनीतिक करियर पर एक सरसरी निगाह डाल लेते हैं।

बख्तियारपुर से शुरू हुआ सफर

बिहार की राजधानी पटना के बख्तियारपुर में 1 मार्च 1951 को जन्मे नीतीश कुमार का बचपन बहुत ही साधारण माहौल में बीता। उनके पिता राम लखन सिंह आयुर्वेदिक वैद्य थे। घर में उन्हें प्यार से मुन्ना कहकर पुकारा जाता था। बचपन में वह अपने पिता के काम में हाथ बंटाते थे। मरीजों के लिए दवा की पुड़िया बनाना उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा था, जिसने उनके भीतर सेवा और जिम्मेदारी का भाव पैदा किया।

छात्र राजनीति से बनाई पहली पहचान

उनके पिता कांग्रेस के सक्रिय सदस्य भी थे और घर का राजनीतिक माहौल उन्हें बचपन से ही प्रभावित करता रहा। कॉलेज पहुंचते-पहुंचते उन्होंने छात्र राजनीति में अपनी अलग पहचान बना ली। वह जल्द ही छात्र नेता के रूप में उभरने लगे। उनकी नेतृत्व क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने छात्रों की मांगों को इतने प्रभावी ढंग से रखा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय को भी उनकी मांगों के आगे झुकना पड़ा और छात्रों की बात माननी पड़ी।

नौकरी छोड़कर राजनीति के सफर पर निकल पड़े

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नीतीश कुमार ने रांची में बिजली विभाग में नौकरी शुरू कर दी थी, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। राजनीति ही उनका असली लक्ष्य था, इसलिए नौकरी छोड़कर वापस पटना लौट आए। जेपी आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण ने उन्हें अहम जिम्मेदारी दी। इमरजेंसी के समय वह भूमिगत रहकर काम करते रहे, लेकिन 1976 में गिरफ्तार कर लिए गए और फिर करीब 9 महीने जेल में बिताए।

Nitish Kumar Handfolded

नीतीश कुमार का पूरा राजनीतिक सफर

हार पर हार मिली तो हौसला भी टूट गया

इमरजेंसी के बाद नीतीश कुमार ने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा। लेकिन राजनीति में उनकी शुरुआत आसान नहीं रही, बल्कि उन्हें उसी तरह के टर्बुलेंस झेलने पड़े, जैसे तूफान में हवाई जहाज को। साल 1977 और 1980 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। लगातार दो हार ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया। हालात ऐसे बने कि उन्होंने राजनीति छोड़ने तक का मन बना लिया और फिर से सिविल कॉन्ट्रैक्टर बनने की दिशा में सोचने लगे।

चंद्रशेखर का भरोसा और नीतीश की किस्मत

जब नीतीश कुमार राजनीति छोड़कर फिर से नौकरी करने के बारे में सोचने लगे थे, उस समय समाजवादी नेता चंद्रशेखर ने उन्हें समझाया और राजनीति में बने रहने के लिए प्रेरित किया। अगर उस वक्त चंद्रशेखर ने उन पर भरोसा न जताया होता, अगर नीतीश कुमार ने हार मान ली होती, तो शायद बिहार की राजनीति का इतिहास कुछ और होता। लेकिन नीतीश कुमार ने राजनीति में वापसी की और धीरे-धीरे राज्य के सबसे बड़े नेताओं में अपनी जगह बना ली।

सबसे ज्यादा 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में ऐसा नाम हैं, जिसे कभी भी कोई भी नजरअंदाज नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री के रूप में नतीश का बिहार में लंबा और प्रभावशाली कार्यकाल अब भी जारी है, जिससे वह जल्द ही इस्तीफा दे देंगे। नीतीश कुमार ने 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राज्य की राजनीति में स्थिरता का चेहरा बने रहे। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उनके नेतृत्व में NDA ने भारी बहुमत हासिल किया, जिससे उनकी लोकप्रियता और भरोसा और भी मजबूत हुआ।

अब दिल्ली की राजनीति में 'मुन्ना'

अब नीतीश कुमार सक्रिय राज्य राजनीति से हटकर राज्यसभा पहुंच गए हैं। वह पहले भी कई बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री भी थे। ऐसे में राज्यसभा की यह नई पारी उनके लंबे राजनीतिक सफर का अंतिम अध्याय साबित हो सकती है, जहां से वह सक्रिय राजनीति को विराम देने की ओर बढ़ते नजर आते हैं।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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