बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में फंस गए हैं। मुंबई के व्यापारी दीपक कोठारी ने शिल्पा, राज कुंद्रा और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इन तीनों के खिलाफ व्यापारी से 60.4 करोड़ की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया गया है। यह केस मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू ) के पास ट्रांसफर कर दिया गया है। इस मामले में शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के वकील प्रशांत पाटिल ने कहा कि उनके क्लाइंट इन सभी आरोपों का खंडन करते हैं। यह एक पुराना मामला है, जिसकी NCLT मुंबई में पहले ही सुनवाई हो चुकी है और इसका फैसला भी आ चुका है। पाटिल ने इस मामले को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इसका मकसद मेरे क्लाइंट की छवि को धूमिल करना है।
बिजनेस बढ़ाने के नाम पर लिटे पैसे
मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि व्यापारी दीपक कोठारी ने शिल्पा शेट्टी और उनके पति पर आरोप लगाया है कि दोनों ने मिलकर उन्हें 60 करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगाया। व्यापारी ने बताया कि ये पैसा उन्होंने 2015 से 2023 के बीच बिज़नेस बढ़ाने के नाम पर दिया था। लेकिन असल में इस पैसे का इस्तेमाल निजी खर्चों में किया गया। जुहू पुलिस स्टेशन में शिल्पा और राज कुंद्रा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब इस मामले में आगे की जांच EOW करेगा।
एडवोकेट पाटिल ने कहा- बेबुनियाद मामला
एडवोकेट प्रशांत पाटिल का इस मामले में बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा कि उनके क्लाइंट को इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के कुछ हिस्सों से जानकारी मिली है कि मुंबई के आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में उनके खिलाफ एक कथित मामला दर्ज हुआ है। पाटिल ने कहा कि मैं शुरुआत में ही स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरे क्लाइंट इन सभी आरोपों का खंडन करते हैं। उनके ऊपर लगाए गए आरोप पूरी तरह से सिविल (नागरिक) प्रकृति के हैं। इस मामले की सुनवाई NCLT मुंबई में हो चुकी है और 04/10/2024 को निर्णय आ चुका है।
एडवोकेट पाटिल ने कहा कि यह एक पुराना लेन-देन है, जिसमें कंपनी आर्थिक संकट में आ गई थी। यह मामला बाद में NCLT में लंबी कानूनी लड़ाई में फंस गया। इसमें कोई आपराधिक (क्रिमिनल) पहलू शामिल नहीं है। हमारे ऑडिटर्स ने समय-समय पर EOW को सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स पेश किए, जिसमें विस्तृत कैश फ्लो स्टेटमेंट भी शामिल है। संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट ने भी पिछले एक साल में 15 से अधिक बार पुलिस स्टेशन जाकर साक्ष्य पेश किए हैं। यह निवेश समझौता पूरी तरह इक्विटी निवेश की प्रकृति का है। जिसमें कंपनी को पहले ही लिक्विडेशन ऑर्डर मिल चुका है। यह आदेश पुलिस विभाग को भी सौंपा जा चुका है। यह एक बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण मामला है, जिसका उद्देश्य मेरे क्लाइंट की छवि को धूमिल करना है।
