मुंबई

भगवान गणेश ने चखा 1101 किलो का लड्डू; आकृति बेहद खास; सागर मंथन से है कनेक्शन!

नागपुर स्थित प्रसिद्ध गणेश टेकडी मंदिर में आज गणेश जयंती पर 1101 किलो के एक लड्डू का भोग चढ़ाया गया।

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भगवान गणेश को चढ़ाया 1101 किलो का लड्डू

नागपुर: भारत के प्रसिद्ध गणेश टेकडी मंदिर में भगवान गणेश को चढ़ाया गया 1101 किलो का 1 लड्डू ,लड्डू पर प्रयागराज में लगे कुंभ की आकृति उकेरी गई, अमृत कलश, संगम में नाव पर लहराता हुआ पताका उकेरा गया। श्री अष्टविनायक मित्र मंडल द्वारा श्री गणेश जन्मोत्सव निमित्त 1101 किलो बूंदी के लड्डू का महाभोग बप्पा के चरणों में आरती के साथ अर्पण किया गया..बाद में इस लड्डू को प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरण किया गया।

भगवान गणेश को चढ़ाया 1101 किलो का लड्डू

ड्डू पर एक तरफ ऊँ अंकित

भगवान गणेश के सामने 1101 किलो का जो एक लड्डू भोग के रूप में चढ़ाया गया था। उस लड्डू पर एक तरफ ऊँ अंकित था तो दूसरी तरफ महाकुंभ लिखा हुआ था..तो तीसरी तरफ संगम में नाव पर लहराता हुआ पताका दर्शाया गया था..एक तरफ अमृत कलश को भी दर्शाया गया है

गणेश जयंती होने की वजह से हजारों की संख्या में लोग भगवान गणेश के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचे हुए हैं..पूरे मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया है। इस लड्डू को बनाने में 15 दिन का वक्त लगा, इसमें 300 किलो बेसन ,250 किलो घी, 450 किलो शक्कर ,101 किलो ड्राई फ्रूट जिसमें किशमिश ,काजू ,केसर, बादाम ,इलायची का समावेश किया गया है। आयोजकों ने कहना था कि प्रयागराज में महाकुंभ चल रहा है..इसी के मद्दे नज़र अमृत कलश के प्रतिलिपि को लड्डू पर उकेरी गया है..सागर मंथन के बाद अमृत कलश से जहां-जहां अमृत का बूंद गिरा था..वहां कुंभ लगता है..यही दर्शाने के लिए लड्डू पर अमृत कलश की आकृति उकेरी गई है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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