Moti Bagh Delhi News Today: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को अचानक एक इमारत के भरभराकर गिरने के बाद आसपास रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें छात्रों से भरा रहने वाले पीजी की जगह मलबे का ढेर दिखाई दिया। इस हादसे में अबतक तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य जारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिण दिल्ली में पांच मंजिला इमारत गिरने की सूचना मिलते ही गोवा का अपना दौरा बीच में ही रद्द कर दिया और वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इस हादसे को लेकर अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पुलिस कमिश्नर और एनडीआरएफ के महानिदेशक से भी बात की।
'देखते ही देखते ढह गया हॉस्टल डेज'
इस बीच, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों ने आंखोंदेखी बताई। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के प्रमुख इलाके के पास प्राइवेट हॉस्टल, भोजनालयों और अन्य दुकानों वाली इस कालोनी में पांच मंजिला इमारत 'हॉस्टल डेज' ढहने के बाद मलबे में फंसे लोगों की मदद के लिए लोग उपलब्ध संसाधनों के जरिए राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।
40-50 साल पुरानी थी इमारत
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर की गई पूछताछ में पता चला कि यह इमारत लगभग 40-50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी आवास के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। अबतक छह लोगों को रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, इमारत क्यों गिरी? यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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कब मिली PCR को सूचना
पुलिस ने एक बयान में बताया कि दोपहर 1.34 बजे साउथ कैंपस थाने में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत ढहने के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (PCR) को सूचना मिली।
'ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो'
समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा के मुताबिक, एक स्थानीय निवासी ने बताया, ''हमें अपने घर में हल्का झटका महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे जमीन हिल गई हो, जैसे भूकंप आया हो। हम बाहर भागे।'' उन्होंने दावा किया कि तत्काल कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों ने खुद भारी कंक्रीट के स्लैब उठाने और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया तथा अंदर फंसे लोगों की तलाश की।
'बाहर आते ही ढह गई इमारत'
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि ऊपरी मंजिलों पर करीब 35 से 40 छात्र रह रहे थे और इमारत ढहने के समय उनमें से कुछ सो रहे थे। उन्होंने दावा किया कि बेसमेंट में काम चल रहा था और वह ढहने से कुछ मिनट पहले ही बाहर निकल पाए थे, इस दौरान उन्हें चोट भी आई। उन्होंने कहा, ''जैसे ही मैं बाहर आया, पूरी इमारत ढह गई।''
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पिछले 20-22 सालों से इलाके में रहने वाली प्रियंका ने बताया कि इलाके में इमारतें पांच या छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, ''कई मकानों को लड़कों के पीजी में बदल दिया गया है और मालिक कहीं और चले गए हैं।'' उन्होंने कहा, ''वे बस संपत्तियों को पीजी का नाम देते हैं, किराया ऑनलाइन लेते हैं और उन्हें इसी तरह संचालित होने के लिए छोड़ देते हैं।''
'नालियां और सीवर तक खुले'
प्रियंका ने दावा किया कि जो पीजी ढहा है, वह 20 साल से अधिक पुराना है और इतने वर्षों में मैंने यहां कोई रखरखाव का काम होते नहीं देखा। पूरा सत्य निकेतन पीजी से भरा हुआ है और मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक ही यहां रहते हैं। हालांकि, पुलिस ने स्थानीयों के हवाले से बताया कि पीजी लगभग 40-50 साल पुराना है।
प्रियंका ने कहा कि यहां नालियां और सीवर तक खुले हैं। इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे। बारिश हो रही थी, इसलिए अधिकतर छात्र अपने कमरों में थे, जबकि कुछ सप्ताहांत होने के कारण घर चले गए थे।
