Mumbai News: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ठाकरे बंधु आज मुंबई में बड़ी रैली करने जा रहे हैं। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में होने वाली इस रैली में दोनों नेता SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और इसके संभावित राजनीतिक असर को लेकर अपनी बात रखेंगे। ठाकरे बंधुओं की यह रैली ऐसे समय में हो रही है, जब महाराष्ट्र में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) इस मुद्दे पर एक साथ नजर आ रही हैं। दोनों नेताओं की साझा राजनीतिक गतिविधि को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
SIR को लेकर ठाकरे बंधुओं के क्या आरोप हैं?
ठाकरे गुट का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाता सूची से जुड़े नियमों और दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल हैं। उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही होती है तो इसका असर वास्तविक मतदाताओं के नाम पर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में चुनाव आयोग का पक्ष और प्रक्रिया के आधिकारिक नियमों को अलग-अलग देखना जरूरी है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। इसलिए किसी भी राजनीतिक आरोप को अंतिम तथ्य के तौर पर देखने के बजाय संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के आधार पर समझना जरूरी होगा।
एक मंच पर उद्धव और राज ठाकरे
इस रैली की खास बात यह है कि लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक ही राजनीतिक मुद्दे पर साथ दिखाई दे रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद और अलग-अलग दल होने के बावजूद SIR के मुद्दे पर उनकी सक्रियता ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। रैली के जरिए दोनों नेता अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के साथ-साथ मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं। मुंबई में होने वाली इस सभा में SIR के अलावा महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति से जुड़े दूसरे मुद्दे भी उठने की संभावना है।
क्यों अहम है यह रैली?
महाराष्ट्र की राजनीति में मतदाता सूची का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने या संशोधन की प्रक्रिया सीधे चुनावी भागीदारी से जुड़ी होती है। ऐसे में SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का तेज होना स्वाभाविक रूप से चुनावी माहौल को प्रभावित करता है। ठाकरे बंधुओं की रैली इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सिर्फ चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों नेताओं के एक मंच पर आने से उनके बीच भविष्य की राजनीतिक नजदीकियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। हालांकि, किसी व्यापक राजनीतिक गठजोड़ या रणनीति पर निष्कर्ष निकालने के लिए दोनों दलों की आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा।
ठाणे से सैकड़ों कार्यकर्ता लोकल ट्रेन से रवाना
मुंबई में होने वाले इस आंदोलन में शामिल होने के लिए ठाणे से भी बड़ी संख्या में शिवसेना (UBT) और शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता लोकल ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हुए हैं। ठाणे में इस रवानगी की अगुवाई शिवसेना (UBT) के नेता राजन विचारे, मनसे के अविनाश जाधव और एनसीपी के मनोज प्रधान सहित स्थानीय पदाधिकारियों ने की।प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए नारे लगाए। इस दौरान “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” और “गली-गली में शोर है, ज्ञानेश कुमार चोर है” जैसे नारे लगाए गए। ये नारे प्रदर्शनकारियों के आरोप और विरोध का हिस्सा हैं।
