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MCD SWAGAM Portal: दिल्ली की 1511 कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने की राह हुई आसान, जानें क्या है प्रक्रिया

MCD News: दिल्ली नगर निगम ने 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए SWAGAM पोर्टल तैयार किया है। ड्रोन सर्वे और आर्किटेक्ट्स के माध्यम से पक्का करने की प्रक्रिया शुरू होगी। जानें फीस और नियम।

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दिल्ली की 1511 कच्ची कॉलोनियों होंगी पक्का (सांकेतिक तस्वीर)

MCD SWAGAM Portal: दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की तैयारी पूरी कर ली है। शनिवार को अधिकारियों ने जानकारी दी कि नियमितीकरण (Regularisation) प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए 'स्वगम' (SWAGAM) पोर्टल का सफल डेमो टेस्टिंग कर लिया गया है और अब इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सरल और सुलभ होगा 'स्वगम' पोर्टल

निगम ने इस पोर्टल को विशेष रूप से आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इसकी भाषा और इंटरफ़ेस को बैंकिंग ऐप्स की तरह सरल बनाया गया है ताकि तकनीकी शब्दों के जाल में फंसे बिना कोई भी व्यक्ति आसानी से आवेदन कर सके। शुक्रवार को हुए डेमो के बाद पोर्टल में कुछ और बदलाव किए गए हैं ताकि आवेदन की प्रक्रिया, क्षेत्र की जानकारी और कानूनी पहलुओं को समझना आसान हो सके।

ड्रोन सर्वे से तैयार हुआ कॉलोनियों का डिजिटल मैप

रेगुलराइजेशन प्रक्रिया के लिए डेटा एकत्र करने का काम तेजी से चल रहा है। अब तक चिह्नित 50 प्रतिशत से अधिक कॉलोनियों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। इस सर्वे के जरिए इमारतों की बनावट, सड़कों के नेटवर्क और संपत्तियों की जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) का आधार तैयार किया जा रहा है। यही डेटा स्वगम पोर्टल में फीड किया जाएगा, जिसके आधार पर निवासी अपने घर को नियमित करने के लिए आवेदन करेंगे।

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना

पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते समय फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि किसी संपत्ति का निर्माण मास्टर प्लान के तहत अनुमत सीमा (FAR) से अधिक पाया जाता है, तो उस पर सामान्य शुल्क से तीन गुना अधिक जुर्माना लगाया जाएगा।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेगुलराइजेशन के लिए कोई एक समान शुल्क नहीं है। इसमें आवेदन शुल्क और स्क्रूटनी शुल्क (Scrutiny Fee) जैसे कई चीजें शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, 1,000 वर्ग मीटर के बिल्ट-अप एरिया के लिए 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 10,000 रुपये का स्क्रूटनी शुल्क देना होगा।

आर्किटेक्ट्स की मदद से अपलोड होगा नक्शा

प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निगम ने करीब 700 आर्किटेक्ट्स को पैनल में शामिल किया है। एक बार मालिकाना अधिकार (Ownership Rights) मिल जाने के बाद, ये आर्किटेक्ट मौके पर जाकर मौजूदा ढांचे का बिल्डिंग प्लान तैयार करेंगे और उसे पोर्टल पर अपलोड करेंगे। यह नक्शा भविष्य के लिए निगम के स्थायी रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएगा।

अगले एक महीने में शुरू होगी प्रक्रिया

अधिकारियों के मुताबिक, जिन निवासियों को अभी तक PM-UDAY योजना के तहत मालिकाना हक नहीं मिला है, उन्हें अगले एक महीने में यह अधिकार मिलने की संभावना है। शुरुआती चरण में, लगभग 40,000 निवासी जिनके पास पहले से मालिकाना हक हैं, वे सीधे स्वगम पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। रेगुलराइजेशन पूरा होने के बाद, निगम इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास की योजना पर काम करेगा।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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