लखनऊ

Yogi Adityanath Birthday: पंचूर से गोरखपुर और संन्यासी से CM का सफर, आदित्यनाथ ने UP को दी नई पहचान

  • Written by: ललित राय
  • Updated Jun 5, 2023, 08:24 AM IST

CM Yogi Adityanath Birthday: आज सीएम योगी आदित्यनाथ का 51वां जन्मदिन है। देश भर से उन्हें बधाइयां एवं शुभकामना संदेश मिल रहे हैं। 2017 में प्रदेश की कमान अपने हाथों में लेने के बाद से योगी आदित्यनाथ ने अपनी नीतियों से प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले गए हैं। आज यूपी की पहचान बदल गई है। देश और दुनिया में यूपी की पहचान तेजी से उभरते एक विकसित राज्य के रूप में हो रही है।

Image

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 51 साल के हो गए हैं।

Photo : PTI

CM Yogi Adityanath Birthday: उत्तराखंड का पौड़ी गढ़वाल जिला तब उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था। यूपी के उस जिले में पंचूर गांव में पांच जून 1972 को एक शख्स ने आंखें खोलीं जिसे अजय सिंह बिष्ट के नाम से जाना गया। लेकिन अजय सिंह बिष्ट की नसीब में कुछ खास लिखा था। माता पिता आम बच्चों की तरह ही उनकी देखभाल करते थे। लेकिन उनकी विलक्षण प्रतिभा आगे के सफर की स्क्रिप्ट लिख रही थी। 1972 से लेकर 1992 तक वो पहाड़ों के हिस्सा रहे। लेकिन उसी बीच एक भाषण प्रतियोगिता में गोरखनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की नजर अजय सिंह बिष्ट पर पड़ी और वो पूछ बैठे कि क्या तुम गोरखपुर चलोगे। यह बात बातों तक सीमित नहीं रही। जैसे अजय सिंह बिष्ट के प्रारब्ध में लिखा था कि पहाड़ की सांसारिक दुनिया से इतर उन्हें कुछ खास काम के लिए बनाया गया।

सीएम योगी का आज 51वां जन्मदिन

आज सीएम योगी आदित्यनाथ का 51वां जन्मदिन है। देश भर से उन्हें बधाइयां एवं शुभकामना संदेश मिल रहे हैं। 2017 में प्रदेश की कमान अपने हाथों में लेने के बाद से योगी आदित्यनाथ ने अपनी नीतियों से प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले गए हैं। आज यूपी की पहचान बदल गई है। देश और दुनिया में यूपी की पहचान तेजी से उभरते एक विकसित राज्य के रूप में हो रही है।

पंचूर से गोरखपुर और गोरखपुर से लखनऊ

1992 में गोरखपुर आने के पहले अवैद्यनाथ और योगी आदित्यनाथ(अजय सिंह बिष्ट) में कई दफा मुलाकात हुई। 1990 के दशक में जब राममंदिर आंदोलन का आगाज हुआ तो अवैद्यनाथ आंदोलन के अगुवा बने। धीरे धीरे मिलने जुलने का सिलसिला चल पड़ा और 1992 में अजय सिंह बिष्ट हमेशा हमेशा के लिए पहाड़ को अलविदा कह दिया। वो मैदानी इलाके का हिस्सा बन गए। सांसारिक दुनिया से इतर संन्यास की राह पकड़ ली। लेकिन मठ के आंगन में राजनीति को भी वो करीब से देख रहे थे क्योंकि उनके गुरु अवैद्यनाथ राजनीति में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहे थे। महंत अवैद्यनाथ की तबीयत जब खराब रहने लगी तो योगी आदित्यनाथ ने मठ की कमान संभाली।

इस तरह सियासत में एंट्री

महंत अवैद्यनाथ ने जब सक्रिय राजनीति को अलविदा कहा तो उस जगह के स्वाभाविक तौर पर आदित्यनाथ दावेदार बने और गोरखपुर से संसदीय जिम्मेदारी संभालने लगे। गोरखपुर के सांसद के तौर पर उन्होंने पूर्वांचल में बाढ़ से होने वाली तबाही को देखा तो इंसेफ्लाइटिस से होने वाली मौतों के दर्द को भी महसूस किया और उसका उदाहरण भारत की संसद बनी। योगी आदित्यनाथ की सियासी पारी में कुछ नया और बड़ा होने वाला था। समय का चक्र धीरे धीरे 2017 के साल पर आ पहुंचा। देश के सबसे बड़े सूबों में से एक यूपी चुनाव के लिए तैयार था।

रुकना शब्द योगी की शब्दावली में नहीं

समाजवादी पार्टी पूरे दमखम के साथ सरकार बनाने का दावा कर रही थी। लेकिन जब नतीजे आए तो हैरान करने वाले थे। बीजेपी दमदार अंदाज में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी थी। सस्पेंस था कि यूपी की कमान कौन संभालने जा रहा है। अलग अलग दावेदारों के बीच एक नाम सामने आया और वो नाम था योगी आदित्यनाथ का। योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम की कुर्सी पर आसीन हो चुके थे। सियासत के इस सफर में योगी आदित्यनाथ का आखिरी पड़ाव कहां होगा वो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन 1972 से 1992, 1992 से लेकर आज तक के सफर को देखें तो एक बात साफ नजर आती है। सांसारिक दुनिया से संन्यासी की दुनिया और अब सियासत की इस दुनिया में उन्होंने साबित कर दिया है कि उनके शब्दकोश में रुकना शब्द नहीं लिखा है।

ललित राय
ललित राय author

खबरों को सटीक, तार्किक और विश्लेषण के अंदाज में पेश करना पेशा है। पिछले 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव है।और देखें

End of Article