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पीएम मोदी ने दिवाली से पहले वाराणसी को दी 6100 करोड़ की सौगात, बताया कि काशी में क्या-कुछ बदला

PM Modi in Kashi: पीएम मोदी ने दीपावली से ठीक पहले अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को 6 हजा 100 करोड़ रुपये की परियोजनताओं की सौगात दी। उन्होंने इस मौके पर कहा कि पिछले 10 वर्षों में काशी में बड़े बदलाव हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में आरजे शंकरा नेत्र अस्पताल का लोकार्पण किया।

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वाराणसी में पीएम मोदी।

Varanasi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 6,100 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें 90 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित आरजे शंकर नेत्र अस्पताल का उद्घाटन भी शामिल है। पीएम ने वाराणसी में आरजे शंकर नेत्र अस्पताल के उद्घाटन के अवसर पर एक सभा को संबोधित किया।

आरजे शंकर नेत्र अस्पताल को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने कहा, 'इस पावन महीने में काशी आना एक पुण्य अनुभूति का अवसर होता है। यहां अपने काशीवासी तो हैं ही, संतजनों और परोपकारियों का भी संग है। इससे सुखद संयोग और क्या हो सकता है। अभी मुझे परम पूज्य शंकराचार्य जी के दर्शन का, प्रसाद पाने का और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है।'

पीएम मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए आगे कहा, 'आरजे शंकर नेत्र अस्पताल वाराणसी और इस क्षेत्र के अनेकों लोगों के जीवन से अंधकार दूर करेगा, उन्हें प्रकाश की ओर ले जाएगा। ये अस्पताल बुजुर्गों की भी सेवा करेगा और बच्चों को भी रोशनी देगा। यहां बहुत बड़ी संख्या में गरीबों को मुफ्त इलाज मिलने वाला है। ये अस्पताल, यहां के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लेकर आया है।'

'पिछले 10 वर्षों में काशी में स्वास्थ्य सेवा में बड़े सुधार हुए'

उन्होंने कहा, 'काशी की पहचान अनंतकाल से धर्म और संस्कृति की राजधानी के रूप में रही है। अब काशी, यूपी के पूर्वांचल के बड़े आरोग्य केंद्र और हेल्थकेयर हब के रूप में भी विख्यात हो रहा है। काशी को प्राचीन काल से ही धर्म और संस्कृति की राजधानी के रूप में जाना जाता रहा है। अब काशी यूपी के पूर्वांचल क्षेत्र का एक प्रमुख स्वास्थ्य सेवा केंद्र और चिकित्सा केंद्र भी बन रहा है। बीएचयू में ट्रॉमा सेंटर हो, दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल हो या मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हो, पिछले 10 वर्षों में काशी में स्वास्थ्य सेवा में बड़े सुधार हुए हैं।'

पीएम ने अस्पताल के उद्घाटन से पहले कांची मठ के शंकराचार्य से भी मुलाकात की। उन्होंने एक प्रदर्शनी का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी एक दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान 2,870 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन और अन्य कार्यों की आधारशिला भी रखने जा रहे हैं।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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