महाराष्ट्र में क्या एक बार फिर कमल खिलेगा ? या फिर उद्धव ठाकरे सरकार गिराने का बदला लेने में कामयाब होंगे? यह सवाल राजनीतिक गलियारों में घूम रहा है। ऐसे में दोनों ही गठबंधन एक दूसरे को पटखनी देने के लिए जोर आजमाइश कर रहे है। लेकिन मुकाबला किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं है। महायुति की अगुवाई करने वाली बीजेपी हरियाणा चुनाव में जीत के बाद उत्साहित है। महा विकास अघाड़ी लोकसभा चुनाव के नतीजों के बदौलत सत्ता में लौटने की उम्मीद कर रहा है।
लोकसभा चुनाव में महागठबंधन ने महाराष्ट्र में 31 सीटें जीती थी। वोट के आंकड़े को देखें तो महा विकास अघाड़ी को 158 विधानसभा में बढ़त मिली थी। दूसरी ओर महायुति को लोकसभा में 17 सीटों से संतोष करना पड़ा था। यह गठबंधन 125 विधानसभा में आगे रहा था। जाहिर सी बात है दोनों गठबंधनों की बढ़त में 33 विधानसभा सीटों का फर्क था। सत्ता की चाबी इसी आंकड़े में छिपी है।
लोकसभा चुनाव में हार के बाद महायुति गठबंधन ने मुफ्त वाली सरकारी योजनाओं के लिए खजाना खोल दिया। बीजेपी माइक्रो मैनेजमेंट में जुट गई। महायुति के लिए चुनौती मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र और मुंबई की सीटें हैं, जहां महाविकास अघाड़ी ने लोकसभा चुनाव में लीड ली थी। पिछले विधानसभा के आंकड़ों को देखें तो 288 विधानसभा में से 31 ऐसी थीं, जहां जीत और हार का अंतर महज़ पांच हजार वोट से कम रहा था। कांटे की टक्कर में महायुति ने 15 और महाविकास अघाड़ी 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2019 में जिन 31 सीटों पर कड़ा मुकाबला रहा था उन सीटों में धुले, नेवासा, भोकरदान, पुसद, रामटेक, हाडगांव, भोकर, नयगांव, डेगलर, मुखेड, उदगीर, अहमदपुर, शोलापुर सेंट्रल, शिरोल, कराड नॉर्थ, कराड साउथ, संगोला, महाडी, पुणे कैंट, मावल, चेंबूर, चांदीवली, माजलगांव, भांडुप, मलाड वेस्ट, डिंदोसी, नासिक सेंट्रल, दहानु और धुले सिटी शामिल है।
इन सीटों पर दोनों गठबंधनों के बीच जबर्दस्त टक्कर हुई थी
लोकसभा चुनाव के दौरान भी इन सीटों पर दोनों गठबंधनों के बीच जबर्दस्त टक्कर हुई थी। वैसे तो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोटिंग पैटर्न अलग-अलग होते हैं, लेकिन वोटों के आंकड़े आने वाले नतीजों का संकेत दे देते हैं।
2024 लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक हालात बदल गया है
2024 लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक हालात बदल गया है। पहले जहां दो गठबंधनों के चार दल आमने सामने थे वहीं अब 6 दल आमने-सामने होंगे। सारा दारोमदार टिकट बंटवारे पर टिका है। महायुति में बीजेपी 155 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि शिवसेना (शिंदे) को 70 के करीब और अजित पवार को 50 के करीब सीटें मिल सकती हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या महायुति में वोट ट्रांसफर का है।वो अभी भी चुनौती बना हुआ है।
