लखनऊ

यूपी: तेलिया अफगान क्यों बन गया तेलिया शुक्ला,बेहद दिलचस्प है कहानी

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 28, 2022, 03:10 PM IST

UP Government Changed The Name of Deoria Village: देवरिया के बरहज तहसील में आने वाले तेलिया अफगान गांव का नाम बदलने की कवायद साल 2019 में शुरू हुई थी। सरयू नदी के किनारे बसे इस गांव का इतिहास अंग्रेजों के समय का है। स्थानीय निवासियों के अनुसार आजादी से पहले के दौर में इस गांव में अफगान लोग रहते थे ।

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ऐसे बदला तेलिया अफगान का बदला नाम

Deoria Village Name Change:यूपी में निकाय चुनाव से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने गोरखपुर और देवरिया में दो नगर पंचायतों का नाम बदल दिया है। इसके तहत देवरिया के बरहज तहसील के तेलिया अफगान गांव का नाम बदलकर 'तेलिया शुक्ला कर दिया गया है। जबकि मुंडेरा बाजार का नाम चौरीचौरा कर दिया गया है। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NOC (नॉन आब्जेक्शन सर्टिफिकेट) भी दे दिया है। बरहज तहसील के तेलिया अफगान का नाम न केवल रोचक है बल्कि उसके बदलने की कहानी भी बेहद रोचक है।

2019 में ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया था

देवरिया के बरहज तहसील में आने वाले तेलिया अफगान गांव का नाम बदलने की कवायद साल 2019 में शुरू हुई थी। उस वक्त ग्राम पंचायत ने जिला प्रशासन को प्रस्ताव पारित कर लिखा था कि तेलिया अफगान गांव का नाम अफगानियों की बस्ती के आधार पर रखा गया था। लेकिन अब उस गांव एक-दो परिवार ही अफगानी मूल के रह गए हैं। ऐसे में उसका नाम तेलिया शुक्ल रख देना चाहिए। क्योंकि न केवल पुकारने में इस नाम का ज्यादातर इस्तेमाल होता है। बल्कि यहां पर आबादी भी शुक्ल लोगों की ज्यादा है।

सरयू के किनारे बसा है गांव

सरयू नदी के किनारे बसे इस गांव का इतिहास अंग्रेजों के समय का है। स्थानीय निवासियों के अनुसार आजादी से पहले के दौर में इस गांव में अफगान लोग रहते थे । जिसके चलते इस गांव का नाम सरकारी दस्तावेजों में तेलिया अफगान दर्ज हो गया। हालांकि आपस में बोल-चाल के लिए तेलिया शुक्ल ही नाम लोग इस्तेमाल करते हैं। दूसरे शुक्ला लोगों की यहां आबादी भी अच्छी संख्या में हैं। अब नए फैसले के बाद सभी जरूर दस्तावेजों में गांव का नाम तेलिया अफगान से बदलकर तेलिया शुक्ल कर दिया जाएगा।

इस तरह बदले जाते हैं नाम

किसी भी शहर, जिले आदि का नाम बदलने के लिए राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजती है। इसके बाद गृह मंत्रालय इन प्रस्तावों पर संबंधित एजेंसियों से सलाह लेता है। इसके साथ ही नाम बदलने के लिए रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग से सलाह ली जाती है। उनसे सहमति मिलने के बाद नाम बदलने के लिए एनओसी जारी कर दिया जाता है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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