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इस वीरान जगह में है Last Road Of India, रामायण काल से जुड़ी है यहां की पहचान

दक्षिण भारत के तट पर बसा यह अनोखा इलाका अपनी अलग भौगोलिक बनावट और इतिहास के कारण खास पहचान रखता है। समुद्र और रेत के टीलों के बीच फैली इसकी खामोशी एक रहस्यमयी वातावरण पैदा करती है। ऐसे में आइए जानें इसके बारे में।

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भारत की आखिरी सड़क

Last Road Of India: दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्र में एक ऐसी जगह मौजूद है जो कि अपनी अनोखी भौगोलिक बनावट और ऐतिहासिक महत्व के कारण विशेष पहचान रखता है। समुद्र और रेत के टीलों के बीच बसा यह इलाका दूर-दूर तक फैले शांत और सुनसान दृश्य प्रस्तुत करता है। यह क्षेत्र एक समय प्राकृतिक आपदा के कारण बड़े बदलाव का गवाह रहा, जिसके बाद यहां मानव बसावट काफी सीमित हो गई। आज भी कुछ मछुआरे अपनी आजीविका के लिए यहां रहते हैं और समुद्र पर निर्भर हैं। दिन के समय यहां लोगों की आवाजाही होती है, जबकि रात में यह स्थान लगभग पूरी तरह शांत हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक कथाओं से जुड़ा यह इलाका धार्मिक दृष्टि से भी महत्व रखता है। यहां की प्राकृतिक संरचना और दूर तक फैला समुद्री दृश्य इसे एक रहस्यमयी और आकर्षक स्थान बनाता है। ऐसे में आइए जानें इसके बारे में।

Dhanushkodi

धनुषकोडी, तमिलनाडु

यह है जगह का नाम

अब इस जगह की बात करें तो इसका नाम धनुषकोडी तमिलनाडु के रामेश्वरम (पंबन द्वीप) के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित एक तटीय क्षेत्र है। यह स्थान अपनी भौगोलिक संरचना और कठिन पहुंच के कारण काफी रहस्यमयी माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए मुख्य भूमि से पंबन द्वीप को पार करना पड़ता है। यात्रा के दौरान कई छोटे मछुआरा गांव भी पड़ते हैं, जो इस मार्ग का हिस्सा हैं।

भारत-श्रीलंका की सबसे नजदीकी सीमा

धनुषकोडी को भारत और श्रीलंका के बीच सबसे निकटतम स्थल माना जाता है। यह क्षेत्र पाक जलसंधि में फैले रेत के टीलों पर स्थित है। यहां से श्रीलंका का मन्नार द्वीप मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर दिखाई देता है। यह स्थान भारत की सबसे छोटी और अनोखी स्थलीय सीमाओं में से एक माना जाता है।

Ruins of Dhanushkodi

धनुषकोडी के खंडहर

1964 का विनाशकारी चक्रवात

दिसंबर 1964 में आए भीषण चक्रवात ने इस पूरे शहर को तबाह कर दिया था। इस आपदा में लगभग 1,800 लोगों की जान चली गई थी। इसी दौरान एक यात्री ट्रेन भी समुद्र में बह गई थी, जिसमें लगभग 100 यात्री सवार थे। इस त्रासदी के बाद सरकार ने धनुषकोडी को मानव निवास के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया।

ऐसे हैं आज के हालात

आज धनुषकोडी पूरी तरह से खंडहर में बदल चुका है, लेकिन यहां लगभग 500 मछुआरे अभी भी रहते हैं। ये लोग करीब 50 झोपड़ियों में रहकर मछली पकड़ने के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं। यहां लोगों को केवल दिन में आने की अनुमति है, जबकि रात में पर्यटकों को वापस भेज दिया जाता है। अपने दर्दनाक इतिहास और उजड़े हुए स्वरूप के कारण धनुषकोडी को अक्सर “भूतों का शहर” भी कहा जाता है। वीरान इमारतें और सुनसान समुद्री किनारे इस जगह को और अधिक रहस्यमयी बना देते हैं।

रामायण से जुड़ी पहचान

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धनुषकोडी वही स्थान है जहां भगवान राम ने अपनी वानर सेना के साथ मिलकर लंका जाने के लिए राम सेतु का निर्माण किया था। इसी पुल को एडम ब्रिज भी कहा जाता है, जो रामेश्वरम को श्रीलंका के मन्नार द्वीप से जोड़ता है। कहा जाता है कि जब भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद अपने धनुष के अंतिम सिरे से इस पुल को समाप्त किया, तभी इस स्थान का नाम “धनुषकोडी” पड़ा, जिसका अर्थ है “धनुष का अंत”।

भारत की अंतिम सड़क

धनुषकोडी को भारत की अंतिम भूमि भी कहा जाता है। यहां एक सड़क है जिसे देश की अंतिम सड़क माना जाता है। इस स्थान से श्रीलंका लगभग 31 किलोमीटर दूर है और साफ मौसम में वहां की झलक भी देखी जा सकती है। धनुषकोडी की स्थलीय सीमा लगभग 50 गज लंबी मानी जाती है, जो इसे दुनिया की सबसे छोटी सीमाओं में से एक बनाती है। यहां से रामेश्वरम 15 किमी दूर है। यह अनोखा भौगोलिक और ऐतिहासिक संगम इसे और भी विशेष बनाता है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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