Nashik News: एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी के रूप में पहचाने जाने वाले नासिक के लासलगांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां लासलगांव-मनमाड रोड स्थित केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के सरकारी गोदाम में बफर स्टॉक का करोड़ों रुपये का प्याज सड़कर बर्बाद हो गया है। इनमें कीड़े लगने लगे हैं और सड़े प्याज से तेज बदबू फैल रही है। जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में लोगों बहुत परेशानी हो रही है। इस घटना के सामने आने के बाद गोदाम की स्टोरेज व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे मजदूर
बताया जा रहा है कि गोदाम में रखी प्याज की कई बोरियों में कीड़े लग गए हैं और बड़ी मात्रा में प्याज पूरी तरह गल चुका है। हैरानी की बात यह भी है कि इस सड़े हुए प्याज को गोदाम से हटा रहे मजदूर बिना मास्क और ग्लव्स जैसी बुनियादी सुरक्षा के ही काम करते नजर आए। जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए खरीदी गई थी प्याज
दरअसल केंद्र सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति बनाए रखने के लिए NAFED और NCCF के जरिए करीब 1.20 लाख टन प्याज की खरीद की थी। इस बफर स्टॉक को आपात स्थिति में बाजार में उतारने के लिए अलग-अलग सरकारी गोदामों में सुरक्षित रखा गया था। लेकिन अब लासलगांव के गोदाम में बड़ी मात्रा में प्याज खराब होने की खबर के बाद स्टोरेज और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
किसानों में नाराजगी, प्रशासन ने झाड़ा पल्ला!
इस बर्बादी पर स्थानीय किसानों ने तीखा रोष जताया है। किसान चंद्रकांत जाधव ने गोदाम प्रबंधन और स्टॉक की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ जब किसानों को उनकी फसल के सही दाम नहीं मिलते, वहीं दूसरी ओर जनता के पैसे से खरीदा गया प्याज इस तरह बर्बाद हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि किसानों को उनकी उपज की उचित कीमत मिलनी चाहिए और इस लापरवाही की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
दूसरी ओर, मामले पर प्रशासनिक रवैया भी सवालों के घेरे में है। जिलाधिकारी का कहना है कि CWC उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में अभी तक प्रशासन के पास कोई आधिकारिक शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई है।
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए खरीदा गया करोड़ों रुपये का प्याज गोदाम में आखिर कैसे सड़ गया? क्या स्टोरेज व्यवस्था में लापरवाही हुई या रखरखाव में कमी रही? आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है? अब पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है।
