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समुद्र तल से भी नीचे है भारत की ये जगह, कहलाता है 'राइस बाउल ऑफ इंडिया'

केरल का कुट्टनाड भारत का सबसे निचला इलाका है, जो समुद्र तल से 2.2 मीटर नीचे स्थित है। ‘राइस बाउल’ के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र अनोखी खेती के लिए जाना जाता है। यहां बंड और नहरों की मदद से जल स्तर नियंत्रित कर धान की खेती की जाती है, जिसे वैश्विक स्तर पर भी मान्यता मिली है।

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समुद्र तल से 7.2 फीट नीचे है ये जगह

क्या आप किसी हिल स्टेशन या रेलवे स्टेशन पर गए हैं? ये प्रश्न इसलिए क्योंकि अगर गए हैं तो वहां पर आपने समुद्र तल से उसकी ऊंचाई के बारे में जरूर कोई पत्थर लगा देखा होगा। समुद्र तल यानी जिस स्तर पर समुद्र का पानी होता, उससे देश और दुनिया में तमाम जगहों की ऊंचाई मापी जाती है। आमतौर पर सभी जगहें समुद्र तल से कुछ न कुछ ऊपर होती हैं। लेकिन दुनिया में कुछ जगहें समुद्र तल से भी नीचे हैं और उनमें से एक जगह भारत में है। भारत में समुद्र तल से नीचे स्थित सबसे निचला इलाका केरल के कुट्टनाड (Kuttanad) में यानी है। यह क्षेत्र लगभग 2.2 मीटर (लगभग 7.2 फीट) समुद्र तल से नीचे मौजूद है। यह इलाका केरल के अलप्पुझा, कोट्टायम और पथनमथिट्टा जिलों के अंतर्गत आता है। केरल में 9 अप्रैल को सभी विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में मतदान होना है और 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस दौरान केरल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हम आपके लिए समय-समय पर लेकर आते रहेंगे। आज जानिए कुट्टनाड के बारे में -

कहलाता है ‘राइस बाउल ऑफ इंडिया’

कुट्टनाड कोई आम जगह नहीं है। यहां पर बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है, इसलिए इसे 'राइस बाउल ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है। यहां समुद्र तल से नीचे की जमीन पर धान की खेती होती है और इसीलिए यह जगह खास है। यही खास बात इसे दुनिया के सबसे अनोखे कृषि क्षेत्रों में भी शामिल करती है।

4 नदियों और झीलों का संगम है यहां

समुद्र तल से करीब 7.2 मीटर नीचे मौजूद कुट्टनाड क्षेत्र चार प्रमुख नदियों पंबा, मीनाचिल, अचंकोविल और मणिमाला के संगम से बना है। यही नहीं यह क्षेत्र भारत की सबसे लंबी झील, वेम्बनाड लेक (Vembanad Lake) के किनारे मौजूद है। यह झील कुट्टनाड की जल व्यवस्था को नियंत्रित करती है।

कैसे होती है समुद्र तल से नीचे खेती

समुद्र तल से नीचे होने की वजह से यहां पर खेती को लेकर संशय हो सकता है। लेकिन जैसा कि हमने ऊपर बताया, यह क्षेत्र भारत में राइस बाउल के नाम से जाना जाता है। यहां पर खेती के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे ‘पोल्डराइजेशन’ कहा जाता है। इसमें मिट्टी के बांध (बंड) और नहरों का जाल बिछाकर अतिरिक्त पानी को बाहर रखा जाता है। इसके अलावा पंपों के जरिए भी जल स्तर नियंत्रित किया जाता है, जिससे खेतों में बाढ़ नहीं आती।

वैश्विक पहचान के साथ पर्यावरणीय महत्व

कुट्टनाड की इस अनोखी खेती प्रणाली को फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (Food and Agriculture Organization) द्वारा ग्लोबली इम्पोर्टेंट एग्रीकल्चरल हेरिटेज सिस्टम (GIAHS) के रूप में मान्यता मिली है। यह क्षेत्र वेम्बनाड-कोल वेटलैंड (Vembanad-Kol Wetland) का हिस्सा है, जो एक रामसर साइट भी है और अपनी जैव विविधता के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

यहां की मिट्टी का प्रकार भी जलोढ़ यानी Alluvial है और यह मिट्टी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। हालांकि, समुद्री ज्वार-भाटा के कारण यहां खारेपन की दिक्कत भी रहती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यहां बायोसलाइन कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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