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86 साल पुराना इंतजार खत्म! लंबित किशाऊ परियोजना पर राज्यों ने मिलाया हाथ; जानें क्या है प्रोजेक्ट

बैठक में निर्णय किया गया कि किशाऊ बहु उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10 प्रतिशत राशि का वित्तीय भार 6 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।

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किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर बनी सहमति (फोटो-@AmitShah)

दिल्ली : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यमुना के पुनर्जीवीकरण के बारे में वर्षों से लंबित 'किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना' पर संबंधित राज्यों में सहमति बन गई। अमित शाह की पहल पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन के लिए सहमत हो गए हैं। समझौता ज्ञापन होने के बाद किशाऊ परियोजना को अनुमोदन के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय जल शक्ति सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव और हिमाचल एवं उत्तराखंड सरकारों के मुख्य सचिव, एवं गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए।

बैठक में निर्णय किया गया कि किशाऊ बहु उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10 प्रतिशत राशि का वित्तीय भार 6 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर बैठक में सहमति बनी। यह निर्णय स्वच्छ और निर्मल यमुना की दिशा में एक अहम पड़ाव सिद्ध होगा, जिससे यमुना में शुद्ध जल का प्रवाह बढ़ेगा।

इससे पहले उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुष्कर सिंह धामी ने लिखा कि कर्तव्य भवन में अमित शाह से भेंट कर प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर उनका बहुमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त किया।

क्या है किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना

किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Multipurpose Dam Project) एक लंबित जलविद्युत और सिंचाई परियोजना है, जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी (यमुना नदी की सहायक नदी) पर बनाई जा रही है। किशाऊ बांध परियोजना का इतिहास काफी पुराना है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले और उत्तराखंड के देहरादून जिले की सीमा पर प्रस्तावित इस परियोजना की अवधारणा सबसे पहले वर्ष 1940 में सामने आई थी। इसके बाद पंजाब सरकार ने 1944-45 के दौरान संभावित परियोजना स्थल का सर्वेक्षण शुरू कराया। हालांकि विभिन्न कारणों से वर्ष 1946 में यह सर्वे कार्य रोक दिया गया और परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।

करीब डेढ़ दशक से अधिक समय तक ठहराव के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1962 में इस परियोजना पर दोबारा काम शुरू किया। विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन के बाद 1965 में परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट में बांध की प्रस्तावित ऊंचाई 235 मीटर निर्धारित की गई थी।

प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा गया। परियोजना के महत्व को देखते हुए उसी वर्ष इसे पंचवर्षीय योजना में भी शामिल कर लिया गया, जिससे इसके विकास की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।

किशाऊ परियोजना से हिमाचल को हर साल मिलेगी 100 करोड़ यूनिट बिजली: सीएम सुक्खू

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े आठ वर्ष पुराने वित्तीय विवाद का समाधान निकल आया है, जिससे 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 15,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है। लंबे समय से परियोजना के वित्तीय ढांचे और लागत वहन को लेकर राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण इसका कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

नई दिल्ली में आयोजित बैठक में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डालने की मांग रखी। बैठक में भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्य दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने परियोजना में राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपए देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि जब परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करा रही है, तो विद्युत घटक के लिए भी इसी प्रकार की सहायता मिलनी चाहिए थी। राज्य सरकार ने इसी मुद्दे को मजबूती से उठाया और उसे सफलता मिली। उन्होंने बताया कि परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश को विद्युत घटक के रूप में प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 600 करोड़ रुपए सालाना होगी, जिससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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