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'अपराधी की कोई जाति नहीं होती...' समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर संजय निषाद का पलटवार

अखिलेश यादव के आरोप पर निषाद ने सामाजिक न्याय समिति के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि करीब 28 लाख सरकारी नौकरियों में लगभग 14 लाख ओबीसी और साढ़े सात लाख एससी वर्ग के लोगों की हैं।

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अखिलेश यादव और संजय निषाद (फाइल फोटो)

एसटीएफ की कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने पलटवार किया। संजय निषाद ने कहा कि सरकार का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना है। इसके अलावा, उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एआई वीडियो पर भी अपनी राय रखी।

संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष को बयानबाजी करने के बजाय अपने शासनकाल को याद करना चाहिए। उन्होंने गोरखपुर के रेल आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार थी, तब आंदोलनकारियों पर गोली क्यों चलाई गई थी और उनके समाज के साथ किस तरह का व्यवहार हुआ था। एसटीएफ का गठन पहले की सरकारों के समय हुआ था। फर्क यह है कि पहले अपराधियों को संरक्षण मिलता था और अब एसटीएफ स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर रही है और अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता मिल रही है। अपराधी की कोई जाति नहीं होती और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।

निषाद ने सामाजिक न्याय समिति के आंकड़ों का हवाला दिया

अखिलेश यादव के आरोप पर निषाद ने सामाजिक न्याय समिति के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि करीब 28 लाख सरकारी नौकरियों में लगभग 14 लाख ओबीसी और साढ़े सात लाख एससी वर्ग के लोगों की हैं। निषाद समुदाय के लोग भूमिहीन और कमजोर होने के कारण उनके पास उत्पीड़न की शिकायतें अधिक आती हैं। पुलिस-प्रशासन में कमजोर वर्गों की शिकायतों को अब पहले की तुलना में ज्यादा सुना जा रहा है। उन्होंने विपक्ष से आरोप लगाने के बजाय यह देखने को कहा कि उसके अपने लोगों से जुड़ी शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?

एसआईआर को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर संजय निषाद ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार चुनाव आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया है। मृत लोगों के नाम हटाना, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना और एक व्यक्ति का नाम दो स्थानों पर होने जैसी विसंगतियों को दूर करना जरूरी है। चुनाव आयोग किसी बड़े बदलाव के लिए सर्वदलीय बैठक करता है। इसलिए एसआईआर को सरकार की कवायद बताना उचित नहीं है।

पीडीए वर्ग से जुड़े अधिकारियों के साथ कथित भेदभाव के सवाल पर उन्होंने सपा और बसपा सरकारों के दौर का हवाला दिया। निषाद ने आरोप लगाया कि अलग-अलग सरकारों में अधिकारियों की नियुक्तियों में राजनीतिक और जातीय पसंद-नापसंद का प्रभाव रहता था। मौजूदा व्यवस्था में अधीनस्थ चयन आयोग और लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की भर्तियों में विभिन्न वर्गों के लोगों की भागीदारी बढ़ी है। पारदर्शिता के कारण अब उन समुदायों के लोगों के नाम भी दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें पहले पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता था।

'यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा'

रामगोपाल यादव के हत्या और फर्जी एनकाउंटर के आरोप पर निषाद ने कहा कि सरकार की नीति 'जीरो टॉलरेंस' की है। सरकार का उद्देश्य लोगों को सुरक्षा, न्याय और सम्मान देना तथा भय का माहौल खत्म करना है। पुलिस अपराधियों को किस तरह गिरफ्तार करती है, यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

एआई वीडियो पर निषाद ने कड़ी आपत्ति जताई

अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए एआई वीडियो पर निषाद ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी है और सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा, पोस्टर और राजनीतिक प्रचार होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रदेश की जनता द्वारा चुना गया नेता और गोरक्षनाथ पीठ का पीठाधीश्वर बताते हुए कहा कि उन्हें इस तरह प्रदर्शित करना अमर्यादित और अनुचित है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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