Karnataka Analog Paneer Ban: देश के अन्य राज्यों के बाद अब कर्नाटक सरकार ने जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एनालॉग यानी गैर-डेयरी पनीर के खिलाफ बड़ा फैसला लिया है। राज्य में ऐसे पनीर के निर्माण, प्रसंस्करण यानी प्रोसेसिंग, पैकिंग, भंडारण, आपूर्ति और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त श्रीनिवास के. के मुताबिक, इस संबंध में 17 अगस्त को अधिसूचना जारी की गई थी।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
अधिकारियों के अनुसार, एनालॉग पनीर सामान्य दूध से बने पनीर का विकल्प होता है। इसे दूध की जगह वनस्पति तेल यानी वेजिटेबल ऑइल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार किया जाता है। विभाग का कहना है कि ऐसे उत्पादों को उपभोक्ताओं के बीच 'पनीर' के नाम से पेश, लेबल या बेचा नहीं जा सकता। विभाग ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक एवं खाद्य योजक) नियम, 2011 के तहत पनीर एक मानकीकृत खाद्य पदार्थ है, जिसे दूध से तैयार किया जाना चाहिए।
किन पर नहीं लागू रहेगा प्रतिबंध?
इसमें दूध की वसा (Milk Fat) महत्वपूर्ण घटक होती है और उसकी जगह वनस्पति तेल या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, कर्नाटक में लिए गए पनीर के कई सैंपल्स की जांच के दौरान उनमें किसी तरह की मिलावट नहीं मिली। इसके बावजूद जन स्वास्थ्य के हित में सरकार ने एनालॉग पनीर पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, यह प्रतिबंध फ्रोजन मिठाइयों, प्रोसेस्ड चीज और मिश्रित वसा वाले स्प्रेड जैसे उन उत्पादों पर लागू नहीं होगा, जिनके लिए खाद्य मानक पहले से अलग निर्धारित हैं। खाद्य कारोबारियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी खाद्य पदार्थ या व्यंजन को तैयार करने में एनालॉग या गैर-डेयरी पनीर का इस्तेमाल, भंडारण, आपूर्ति अथवा बिक्री न करें।
