कानपुर

क्या कानपुर में बर्ड फ्लू लेकर आया था 'पटौदी', मौत के बाद चिड़ियाघर में डर का माहौल

इलाज के लिए गोरखपुर से कानपुर आए बब्बर शेर 'पटौदी' की मौत से चिड़ियाघर में डर का माहौल बन गया है। बर्ड फ्लू के संक्रमण की आशंका से प्रशासन ने जिलाधिकारी को चिठ्ठी लिखकर दवा छिड़काव की मांग की है। कानपुर का चिड़ियाघर इसी आशंका के चलते अब 19 मई तक बंद रहेगा।

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पटौदी की मौत के बाद कानपुर चिड़ियाघर में हड़कंप (सांकेतिक तस्वीर)

Kanpur Zoo: कानपुर चिड़ियाघर में इलाज के लिए लाए गए पटौदी शेर की गुरुवार की सुबह मौत हो गई। शेर की तबीयत काफी समय से खराब थी और उसने खाना-पीना बंद कर दिया था। डॉक्टरों के अनुसार, पटौदी अपनी औसत उम्र पूरी कर चुका था और काफी कमजोर हो गया था। शेर की मौत के पीछे संक्रमण, विशेषकर बर्ड फ्लू की आशंका जताई जा रही है। जिसके कारण कानपुर जू में हड़कंप मच गया है।

दवा छिड़काव की मांग

चिड़ियाघर प्रशासन ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर बाड़ों, आवासीय परिसर और बाकी इलाकों में फॉगिंग कराने की मांग की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर निगम चिड़ियाघर परिसर में सात दिनों तक प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक फॉगिंग अभियान चलाएगा। इस फॉगिंग में सोडियम हाइपो क्लोराइड, पोटैशियम परमैगनेट और फॉर्मेल्डीहाइड जैसी दवाओं का उपयोग किया जाएगा ताकि बर्ड फ्लू के संक्रमण की संभावना को रोका जा सके।

19 मई तक बंद रहेगा चिड़ियाघर

पहले ही बर्ड फ्लू की आशंका के चलते चिड़ियाघर को दर्शकों के लिए बंद कर दिया गया था, जिसे अब 19 मई तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही यहां काम कर रहे कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले इटावा सफारी पार्क और गोरखपुर चिड़ियाघर को भी संक्रमण की आशंका के चलते बंद किया गया था। कानपुर चिड़ियाघर में भी सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि अन्य जानवर सुरक्षित रहें और कोई और नुकसान न हो।

गोरखपुर से आया था पटौदी

गोरखपुर चिड़ियाघर से शेर पटौदी को इलाज के लिए कानपुर लाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जिससे चिड़ियाघर प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। मौत के बाद शेर का पोस्टमार्टम कराया गया और फिर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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