जब हौसले बुलंद हों और अपनों का साथ हो, तो दुनिया की कोई भी चुनौती बड़ी नहीं लगती। यह अब केवल कहने वाली बात नहीं है क्योंकि इस सच कर दिखाया है मां-बेटे की एक अनूठी जोड़ी ने। 45 साल की जिगीषा टेलर और उनके 21 साल के बेटे आदित्य कपाड़िया ने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, IIT Madras से एक साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर इतिहास रच दिया है। जहां एक तरफ मां ने सालों के लंबे अंतराल के बाद दोबारा किताबों से नाता जोड़ा, वहीं उनके बेटे ने इस सफर में उनके सबसे बड़े मददगार और मेंटर की भूमिका निभाई।
करियर में लंबा ब्रेक और वापसी की बड़ी चुनौती
जिगीषा टेलर के लिए यह सफर आसान नहीं था। जिगीषा टेलर एक टीचर थी, जिन्होंने छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स पढ़ाने में अपने जीवन के 16 से अधिक साल बिताए थे। लेकिन, अपने परिवार और बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने के लिए उन्हें अपने करियर से एक लंबा ब्रेक लेना पड़ा। सालों तक घर-परिवार संभालने के बाद, उन्होंने दोबारा पढ़ाई की तरफ कदम बढ़ाना एक साहसिक फैसला लिया। उनके बेटे आदित्य ने अपनी मां के भीतर सीखने की उस ललक को पहचाना और उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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बेटे के कहने पर IIT मद्रास में लिया दाखिला
अपने बेटे के प्रोत्साहन से प्रेरित होकर, जिगीषा ने IIT मद्रास के 'डेटा साइंस और एप्लीकेशन' में BS डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन ले लिया। एक लंबे गैप के बाद कॉलेज की पढ़ाई और वो भी तकनीकी विषयों को समझना बेहद कठिन था। अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए जिगीषा ने बताया कि "शुरुआत में, इतने लंबे गैप के बाद, गणित और स्टैटिस्टिक को फिर से सीखना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन कुछ हफ्तों के बाद, मुझे सीखने की प्रक्रिया में मज़ा आने लगा" और इस प्रकार उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस किया।
जब बेटा बना मां का 'टीचर' और पढ़ाई का साथी
यह असाधारण कहानी केवल बेटे द्वारा मां को पढ़ने के लिए प्रेरित करने और आईआईटी में एडमिशन लेने तक ही सीमित नहीं है। इस कहानी का एक और खूबसूरत पहलू यह है कि अपनी मां के साथ आदित्य ने एआई (AI) और डेटा साइंस के प्रति अपने लगाव के कारण साल 2021 में आईआईटी के BS डिग्री प्रोग्राम में दाखिला लिया था।
जब मां ने भी बेटे के साथ आईआईटी में एडमिशन लिया तो आदित्य केवल उनके बेटे नहीं रहे, बल्कि पढ़ाई के उनके साथी के साथ उनके टीचर और मेंटर बन गए। आदित्य ने कॉलेज के कठिन असाइनमेंट को पूरा करने, बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने और परीक्षाओं की तैयारी में अपनी मां को हर कदम पर गाइड किया और दोनों ने मिलकर पढ़ाई की।
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क्लास में ग्रेड्स के लिए फ्रेंडली कॉम्पिटिशन
एक ही क्लास और एक ही कोर्स होने की वजह से दोनों के बीच पढ़ाई को लेकर एक मजेदार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (फ्रेंडली कॉम्पिटिशन) रही। मां-बेटे के बीच अक्सर इस बात को लेकर फ्रेंडली मुकाबला रहता था कि एग्जाम में कौन 'A' या 'S' ग्रेड लेकर आएगा। इस कड़ी मेहनत का सुखद परिणाम तब देखने को मिला जब कॉनवोकेशन सेरेमनी के दौरान दोनों ने एक साथ मंच पर कदम रखा और एक साथ डिग्री प्राप्त की। इस गौरवशाली पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, "एक साथ स्टेज पर जाना किसी चमत्कार जैसा लगा।"
नई मंजिलों की ओर बढ़ते कदम
आज यह जोड़ी अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भविष्य के नए सपनों को बुन रही है। आदित्य ने एक पेशेवर डेटा साइंटिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत कर दी है। जबकि उनकी मां जिगीषा इस नई डिग्री से मिले आधुनिक ज्ञान और बढ़े हुए आत्मविश्वास के साथ एक बार फिर से टीचिंग के क्षेत्र में लौटने की तैयारी कर रही हैं।
