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झारखंड टेंडर कमीशन घोटाला : ED की 5वीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल, 14 इंजीनियर नए आरोपी

जांच एजेंसी के अनुसार करीब 3048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन में इस तरह की अवैध वसूली हुई, जिससे 90 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई होने का अनुमान है। इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जिन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है उनमें मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त) सिंगराय टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार और प्रमोद कुमार शामिल हैं।

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कोर्ट (सांकेतिक फोटो-Istock)

झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर के बदले कमीशन लेने के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। ED के रांची ज़ोनल ऑफिस ने 17 मार्च को रांची की विशेष PMLA अदालत में इस मामले में पांचवीं सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कम्प्लेंट (चार्जशीट) दाखिल की है। इस नई चार्जशीट में विभाग के 14 इंजीनियरों और अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही इस केस में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।

यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), जमशेदपुर द्वारा दर्ज FIR नंबर 13/2019 से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। ED की जांच में सामने आया है कि ग्रामीण कार्य विभाग और उससे जुड़े संस्थानों में टेंडर दिलाने के बदले ठेकेदारों से 3 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था। यह पैसा एक तय सिस्टम के तहत ऊपर तक पहुंचाया जाता था। जांच के मुताबिक इस कमीशन का 1.35 प्रतिशत हिस्सा तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के जरिए पहुंचता था। वहीं 0.65 से 1 प्रतिशत हिस्सा विभागीय सचिव को मिलता था और बाकी रकम मुख्य अभियंताओं और अन्य इंजीनियरों में बांटी जाती थी।

90 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई

जांच एजेंसी के अनुसार करीब 3048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन में इस तरह की अवैध वसूली हुई, जिससे 90 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई होने का अनुमान है। इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जिन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है उनमें मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त) सिंगराय टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार और प्रमोद कुमार शामिल हैं। इसके अलावा कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अनिल कुमार (सेवानिवृत्त) को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं सहायक अभियंता राम पुकार राम और रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) तथा पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और इंजीनियर-इन-चीफ उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) का नाम भी इसमें शामिल है।

ED के मुताबिक जांच में इन अधिकारियों की कमीशन की रकम इकट्ठा करने, उसे आगे पहुंचाने और पूरे रैकेट में सक्रिय भूमिका सामने आई है। इस मामले में अब तक ED झारखंड, दिल्ली और बिहार में 52 जगहों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच के दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल और उनके सहयोगी जहांगीर आलम शामिल हैं। ये तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

इसके अलावा ED ने इस मामले में लगभग 44 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच के दौरान करीब 38 करोड़ रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं, जिसमें 32.20 करोड़ रुपये संजीव कुमार लाल से जुड़े ठिकानों से और 2.93 करोड़ रुपये मुन्ना सिंह के यहां से बरामद हुए थे। साथ ही 8 लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं। ED इससे पहले इस मामले में एक मुख्य और चार सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में दाखिल कर चुकी है, जिन पर अदालत संज्ञान ले चुकी है। अब पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट के बाद इस मामले की जांच और तेज हो गई।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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