पसीना आना केवल शरीर का एक स्वाभाविक थर्मास्टेट सिस्टम है, जो वर्कआउट के दौरान बढ़ते तापमान को नियंत्रित और ठंडा करने के लिए पानी बाहर निकालता है। जब पसीना सूखता है या आप पानी पीते हैं, तो शरीर का वजन वापस सामान्य हो जाता है। इसका फैट बर्निंग प्रक्रिया से सीधा कोई संबंध नहीं होता।
शरीर से चर्बी तभी घटती है जब आप पूरे दिन में जितनी कैलोरी लेते हैं, उससे ज्यादा बर्न करते हैं। इसे कैलोरी डेफिसिट कहा जाता है। वर्कआउट के दौरान पसीना निकले या न निकले, अगर आपकी डाइट संतुलित है और आपकी मांसपेशियां मेहनत कर रही हैं, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा चर्बी का ही इस्तेमाल करता है।
वर्कआउट प्रभावी है या नहीं, इसे नापने का सबसे सटीक जरिया आपकी हार्ट रेट है। इसलिए पसीने देखने के बजाय अपनी दिल की धड़कन और वर्कआउट की तीव्रता पर ध्यान देना चाहिए।
वर्कआउट की सफलता इसमें है कि आप हर हफ्ते अपनी क्षमता को थोड़ा बढ़ा रहे हैं या नहीं। इसे प्रोग्रेसिव ओवरलोड कहते हैं। यह निरंतर प्रयास ही आपके शरीर की शेप बदलता है और फैट लॉस को तेज करता है, न कि सिर्फ जिम में पसीना बहाना।
फैट बर्न करने में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और मसल्स बनाने का सबसे बड़ा योगदान होता है। जब आप वेट लिफ्टिंग करते हैं, तो आपकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और आपका मेटाबॉलिज्म तेज होता है। बढ़ा हुआ मेटाबॉलिज्म वर्कआउट खत्म होने के बाद फैट बर्न करता रहता है।
केवल जिम में पसीना बहाने से नतीजा नहीं मिलता, जब तक आप अपने शरीर को सही आराम नहीं देते। रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद और सही न्यूट्रिशन के बिना बहाया गया सारा पसीना बेअसर साबित हो सकता है।
वर्कआउट के बाद पसीने से भीगी टी-शर्ट देखकर खुश होने के बजाय अपने स्टैमिना, इंच लॉस और ऊर्जा के स्तर को ट्रैक करें। यही असली और टिकाऊ फिटनेस की पहचान है।