Jaisalmer News: राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर में गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व बेहद हर्षोल्लास, अकीदत और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। जिलेभर की मस्जिदों और ईदगाहों में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने सुबह विशेष नमाज अदा कर मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी सौहार्द की दुआएं मांगी। शहर के गीता आश्रम चौराहा स्थित बड़ी ईदगाह, बैरा रोड स्थित कदीमी ईदगाह और गड़ीसर सरोवर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने ईद की नमाज अदा की और एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी। लेकिन इस बार जैसलमेर में ईद की खुशियों के बीच एक ऐसा अनूठा सामाजिक संदेश देखने को मिला।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बैनर तले खुला मोर्चा
ईदगाहों में मुख्य नमाज संपन्न होने के तुरंत बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बैनर तले "गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करो" मांग को लेकर एक विशेष हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान में मुस्लिम समाज के युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बैनर पर अपने हस्ताक्षर कर इस मांग को अपना पूरा समर्थन दिया।
'गाय सबकी आस्था का केंद्र, सम्मान करना हमारा फर्ज'
कदीमी ईदगाह के सचिव अब्दुल कय्यूम गोरी ने इस पहल के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि "यह पहल पूरी तरह से सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और सभी धर्मों की आस्थाओं के सम्मान को समर्पित है। गाय भारतीय संस्कृति और हिंदू समाज की आस्था से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। इसलिए इसे देश का राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर मुस्लिम समाज भी पूरी सकारात्मकता के साथ आगे आया है।" उन्होंने आगे जानकारी दी कि जैसलमेर से इस अभियान के तहत जुटाए गए सभी हस्ताक्षरयुक्त बैनरों को जिला कलेक्टर के माध्यम से देश की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा, ताकि स्थानीय समाज की यह पावन भावना सरकार तक पहुंच सके।
दिल्ली से शुरू हुआ राष्ट्रव्यापी अभियान
अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे मौलवी हारुन रसीद गोरी ने कहा कि मुस्लिम समाज हमेशा से ही देश की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी प्रेम और धार्मिक सौहार्द को सर्वोपरि मानता आया है। उन्होंने बताया "यह एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसकी शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से हुई थी और अब इसे देशभर में भारी समर्थन मिल रहा है। जैसलमेर के मुस्लिम समाज ने भी बड़ी संख्या में हस्ताक्षर कर अपनी भागीदारी निभाई है। हमारा उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, आपसी सम्मान और अखंड सामाजिक एकता का संदेश देना है।" ईद के इस मुबारक मौके पर शुरू हुई इस खास मुहिम की चर्चा अब पूरे जैसलमेर जिले और सोशल मीडिया पर जोरों से चल रही है। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की है।
