एक समय था जब हमारी रसोई मौसम और सेहत के हिसाब से चलती थी। पुराने जमाने के लोग अपने खानपान में ऐसे पारंपरिक अनाज शामिल करते थे, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने के साथ रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा होते थे। धीरे-धीरे पैकेट वाले प्रोसेस्ड फूड और इंस्टेंट खाने के चलन में ये अनाज हमारी थाली से दूर होते गए।
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अब जब लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, तो लोग एक बार फिर श्रीअन्न (Millets) की ओर लौट रहे हैं। अगर आप भी अपनी डाइट में स्वाद और सेहत का अच्छा संतुलन चाहते हैं, तो इन 5 पारंपरिक अनाजों को जरूर जानिए।
1. कोदो (Kodo Millet): डायबिटीज के लिए अच्छा विकल्प
कोदो एक पुराना भारतीय अनाज है, जिसे पहले कई घरों में चावल की जगह भी खाया जाता था। इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम माना जाता है। इसी वजह से यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देता।
कैसे खाएं:
कोदो को 4 से 6 घंटे भिगोकर वेज पुलाव, खिचड़ी या दलिया बनाया जा सकता है।
2. सांवा (Barnyard Millet): हल्का और जल्दी पचने वाला अनाज
सांवा को अक्सर व्रत में खाया जाता है, लेकिन इसे रोज की डाइट में भी शामिल किया जा सकता है। इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है और यह आसानी से पच जाता है। इसलिए वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह अच्छा विकल्प माना जाता है।
कैसे खाएं:
सांवा से उपमा, खिचड़ी, पुलाव या हल्की खीर बनाई जा सकती है।
3. कुटकी (Little Millet): आयरन और प्रोटीन से भरपूर
कुटकी छोटे दानों वाला अनाज है, लेकिन पोषण के मामले में काफी अच्छा माना जाता है। इसमें आयरन और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन पाया जाता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
कैसे खाएं:
कुटकी के आटे से रोटी, चीला या हेल्दी पैनकेक बनाए जा सकते हैं।
4. चेना (Proso Millet): प्रोटीन से भरपूर अनाज
चेना में प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसमें कई जरूरी अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं। इसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल करना आसान है।
कैसे खाएं:
चेना को उबालकर दाल के साथ खाया जा सकता है। इसके आटे का इस्तेमाल इडली या दूसरे व्यंजनों में भी किया जा सकता है।
5. कंगनी (Foxtail Millet): हड्डियों और इम्युनिटी के लिए फायदेमंद
कंगनी में कैल्शियम, फाइबर और विटामिन B1 (थायमिन) अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसे लंबे समय से पारंपरिक भोजन का हिस्सा माना जाता रहा है।
कैसे खाएं:
कंगनी से दलिया, डोसा, खिचड़ी या पुलाव आसानी से बनाया जा सकता है।
मिलेट्स पकाने का आसान नियम
मिलेट्स को पकाने से पहले 4 से 6 घंटे पानी में भिगो देना बेहतर माना जाता है। इससे ये जल्दी पकते हैं और इनमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व कम हो जाते हैं, जिससे शरीर इनके पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से उपयोग कर पाता है।
नोट: अगर आपको डायबिटीज, किडनी की बीमारी या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
