Jaipur Dudu News: राजस्थान के जयपुर जिले के दूदू स्थित ऐतिहासिक भैराना धाम में संत दादू दयाल की कर्मस्थली के आसपास की जमीनों के सरकारी अधिग्रहण को लेकर पैदा हुआ विवाद देर रात एक बड़े प्रशासनिक समझौते के बाद शांत हुआ। संतों की अगुवाई और खींवसर सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के समर्थन से निकाला जा रहा 'राजधानी जयपुर मार्च' प्रशासन के साथ हुई लंबी वार्ता के बाद बीच में ही रोक दिया गया है। सरकार द्वारा इस पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित किए जाने के आधिकारिक ऐलान के बाद आंदोलनकारियों ने अपना रुख बदला।
जयपुर-अजमेर हाईवे पर आधी रात को बनी सहमति
जमीन अधिग्रहण के विरोध में बुधवार दिन से शुरू हुआ यह गतिरोध देर रात तक बेहद तनावपूर्ण माहौल में बदल गया था। संतों और RLP कार्यकर्ताओं का हुजूम जयपुर की तरफ आगे बढ़ रहा था, जिसे पुलिस और प्रशासन ने जयपुर-अजमेर हाईवे पर ही रोक दिया। हाईवे पर ही रात करीब 1:00 बजे प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच कड़कड़ाती बातचीत का दौर शुरू हुआ। करीब एक घंटे से अधिक समय तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन ने सरकार की ओर से एक विशेष कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे संतों ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद रात करीब 2:00 बजे जयपुर कूच के कार्यक्रम को स्थगित करने की घोषणा की गई, जिससे पुलिस और प्रशासनिक अमले ने राहत की सांस ली।
अगले हफ्ते होगी कमेटी की पहली बैठक
सरकार द्वारा गठित की जा रही इस विशेष कमेटी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ संतों की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल को भी शामिल किया गया है। तय समझौते के मुताबिक, इस कमेटी की पहली आधिकारिक बैठक अगले हफ्ते आयोजित की जाएगी, जिसमें भैराना धाम की जमीनों के अधिग्रहण से जुड़े तकनीकी और धार्मिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा कर बीच का रास्ता निकाला जाएगा।
हनुमान बेनीवाल की चेतावनी: 'बात नहीं मानी, तो फिर होगा आंदोलन'
भैराना धाम की जमीन बचाने के इस आंदोलन को राजनीतिक मजबूती दे रहे राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार को साफ शब्दों में चेतावनी दी है। "संत दादू दयाल की पवित्र कर्मस्थली के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अभी सरकार ने हमारी मांग पर कमेटी गठित करने का ऐलान किया है, इसलिए मार्च रोका गया है। लेकिन अगर सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद संतों के पक्ष में फैसला नहीं लिया और रिपोर्ट को नहीं माना, तो यह आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।"
